Bakrid Celebration: किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट: किशनगंज जिले में इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार को पूरी अकीदत, पारंपरिक हर्षोल्लास और कौमी एकता के साथ शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया. इस मुकद्दस मौके पर सुबह से ही शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में उत्सव का माहौल देखा गया. नये और रंग-बिरंगे परिधानों से सजे मुस्लिम समुदाय के हजारों अकीदतमंदों ने निर्धारित समय पर जिले की विभिन्न मस्जिदों और ऐतिहासिक ईदगाहों में पंक्तिबद्ध होकर बकरीद की विशेष नमाज अदा की. नमाज के दौरान बारगाह-ए-इलाही में सिर झुकाकर सभी ने देश और समाज में आपसी भाईचारे, अमन, चैन, प्रगति और खुशहाली के लिए सामूहिक रूप से दुआएं मांगीं.
प्रमुख नमाज स्थलों पर उमड़ी भीड़, नमाज के बाद दी गई कुर्बानी
किशनगंज शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी सुबह से ही नमाजियों का हुजूम सड़कों पर दिखने लगा था. शहर के प्रमुख और ऐतिहासिक नमाज स्थलों पर अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी:
- अंजुमन इस्लामिया
- खगड़ा ईदगाह
- पुरानी खगड़ा
- करबला मैदान
सभी प्रमुख स्थलों पर जैसे ही मुख्य इमाम साहब ने नमाज मुकम्मल कराई, पूरा माहौल “ईद मुबारक” की गूंज से सराबोर हो उठा. लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की दिली मुबारकबाद दी. इसके पश्चात, पैगंबर हजरत इब्राहिम और उनके सुपुत्र पैगंबर हजरत इस्माइल के असीम त्याग और ऐतिहासिक कुर्बानी को याद करते हुए सुन्नत-ए-इब्राहिमी के तहत पशुओं की कुर्बानी दी गई. इस दौरान समाज के प्रबुद्ध लोगों ने त्योहार के मर्म को साझा करते हुए समाज के गरीब और जरूरतमंद तबके का विशेष ख्याल रखने और उनके बीच तबर्रुक (मांस) का ससमय वितरण करने की अपील की.
त्योहार को लेकर हर ओर दिखी रौनक, बच्चों में रहा भारी उत्साह
बकरीद के इस पावन अवसर पर पूरे किशनगंज जिले के बाजारों, चौराहों और रिहाइशी मोहल्लों में एक अलग ही रौनक और खूबसूरती देखने को मिली. नए कुर्ते-पायजामे और टोपियों में सजे बच्चे और युवा अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेते और ईदगाहों की तरफ बढ़ते दिखे. नमाज और कुर्बानी की प्रकिया संपन्न होने के बाद बधाई देने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा. लोग एक-दूसरे के घरों में जाकर सेवइयों और विभिन्न व्यंजनों का लुत्फ उठाते नजर आए, जिससे सामाजिक समरसता की एक बेहतरीन मिसाल पेश हुई.
सुरक्षा का अभेद्य किला: 290 स्थानों पर मजिस्ट्रेट तैनात, सोशल मीडिया पर पैनी नजर
प्रशासनिक मुस्तैदी: त्योहार के दौरान जिले में किसी भी प्रकार की अफवाह, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश, अराजकता या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस महकमे की ओर से सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतजाम किए गए थे.
सुरक्षा व्यवस्था के मुख्य बिंदु:
- मजिस्ट्रेट और पुलिस बल: जिला मुख्यालय के निर्देश पर पूरे जिले में करीब 290 प्रमुख और चिन्हित स्थानों पर दंडाधिकारियों (Magistrates) के साथ भारी संख्या में पुलिस अधिकारियों व सशस्त्र बलों की प्रतिनियुक्ति की गई थी.
- संवेदनशील इलाकों में गश्ती: जिले के 20 से अधिक अत्यधिक संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल (एडिशनल फोर्स) तैनात की गई थी और पुलिस की मोबाइल वैन लगातार गश्ती अभियान चला रही थी.
- सीसीटीवी और ड्रोन से मॉनिटरिंग: प्रमुख चौक-चौराहों, मुख्य बाजारों और भीड़भाड़ वाले संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से ही तीसरी आंख यानी सीसीटीवी (CCTV) कैमरे एक्टिव कर दिए गए थे, जिससे जिला नियंत्रण कक्ष से सीधी निगरानी हो रही थी. इसके अलावा, घनी आबादी वाले और संवेदनशील पॉकेट्स में ड्रोन कैमरों की मदद से आसमान से भीड़ की गतिविधियों और संदिग्ध हलचलों पर पैनी नजर रखी गई.
- सोशल मीडिया पर आईटी सेल का पहरा: जिला पुलिस की विशेष साइबर और आईटी सेल द्वारा फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स (ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 24 घंटे कड़ी मॉनिटरिंग की जा रही थी, ताकि भड़काऊ या भ्रामक पोस्ट करने वाले असामाजिक तत्वों पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके. प्रशासन और आम जनता के इसी बेहतर समन्वय के कारण पूरा त्योहार शांतिपूर्वक संपन्न हुआ.
