सैकड़ों वर्ष प्राचीन आलौकिक भगवान विष्णु की मूर्ति बरामदगी मामले में अधिकारियों ने की टीम पहुंची स्थल पर

आसपास के दूसरे गांव के लोग भी मूर्ति दर्शन को लेकर स्थल में आ जा रहे थे.

बरामद मूर्ति को पुरातत्व निदेशालय पटना को भेजा जायेगा

बहादुरगंज

खुदाई के दौरान मिली सैंकड़ों वर्ष प्राचीन आलौकिक भगवान बिष्णु की मूर्ति बरामदगी प्रकरण में प्रशासन की टीम शुक्रवार को रामचर भौरादह पहुंची एवं संबंधित ग्रामीणों की आस्था व भावना को देख काफी मान- मनौवल के पश्चात आखिरकार बरामद मूर्ति को जिला मुख्यालय ले गयी. बरामद मूर्ति को जिला प्रशासन के आदेश के मुतल्लिक ट्रेजरी के जरिए पुरातत्व निदेशालय पटना को भेजा जाएगा. इससे पहले जिला के कला संस्कृति पदाधिकारी प्रह्लाद कुमार की अगुवाई में पुलिस प्रशासन की टीम उस स्थल पर पहुंची तो मौके पर गांव की महिलाओं की भीड़ का बरामद भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष पूजा अर्चना व भजन कीर्तन जारी था. आसपास के दूसरे गांव के लोग भी मूर्ति दर्शन को लेकर स्थल में आ जा रहे थे. इस बीच मूर्ति सौंपने की बात को लेकर प्रशासनिक दखलंदाजी की बात वहां के लोगों कतई हजम नहीं था. ग्रामीण वहां गांव के समीप मंदिर निर्माण एवं मूर्ति स्थापना के बाबत जमीन दान देने की बात करने में लगे थे. वहीं अधिकारियों की टीम नियम प्रावधानों का हवाला देकर ग्रामीणों को पुरातत्व विभाग एवम जिला प्रशासन के निर्देश से अवगत करवाने में लगा था. इतना ही नहीं टीम के अधिकारी स्थल में मौजूद भीड़ की मूर्ति के प्रति आस्था को देख ये बताने से भी पीछे नहीं थे कि संबंधित पुरातत्व विभाग की समुचित प्रक्रिया के बाद मूर्ति ग्रामीणों को सौंपी जा सकती है. आखिरकार घंटों भर वार्ता के पश्चात मूर्ति वापसी की बात पर लोगों की सहमति बनी एवं आस्था रूपी भगवान बिष्णु की प्राचीन मूर्ति को सौंप दिया गया. जहां ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मूर्ति को वापस लाने एवं गांव समीप मंदिर स्थापित किये की मांग को लेकर जिला मुख्यालय के लिए निकल पड़े. इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की टीम में बीडीओ अरुण कुमार सरदार व थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर संदीप कुमार सहित पुलिस प्रशासन के दर्जनों अधिकारी व जवान साथ थे. बतातें चलें कि चार दिन पहले सरंडा गांव समीप मिट्टी के अंदर से ये आकर्षक मूर्ति वहां मिट्टी खुदाई कार्य दौरान ट्रैक्टर ड्राइवर व मजदूरों को हाथ लगी थी. जहां प्राचीन पत्थर की अदभुत कला शैली व नक्काशी से निर्मित अलौकिक मूर्ति भगवान विष्णु की प्रतीत लग रही थी. तब जाकर ट्रैक्टर चालक राम कुमार उर्फ शेखर द्वारा उस मूर्ति को सुरक्षित तरीके से रामचर भौरादह गांव स्थित अपने घर पर लाया गया एवं तत्काल विधिवत पूजा अर्चना हेतु सुरक्षित रखा गया. इस बीच मूर्ति की बरामदगी क्षेत्र में कौतूहल का विषय बन कर रह गया. जानकारों की मानें तो मूर्ति को देखकर लगता है कि प्राचीन मूर्ति बंगाल के पाल साम्राज्य की भी हो सकती है, जो 8वीं से 12वीं शताब्दी के बीच की है. ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि यह आकर्षक मूर्ति तकरीबन एक हजार वर्ष पुरानी तक हो सकती है. इस प्रकार की अदभुत कला शैली व नक्काशी के दम पर निर्मित ऐसी मूर्ति तत्कालीन उस प्राचीन दौर में धार्मिक स्थलों और मंदिरों में स्थापित की जाती थी. प्रकरण की चर्चा क्षेत्र में लोगों की जुबान पर है एवं आकर्षक भगवान विष्णु की मूर्ति को लेकर अपने-अपने अंदाज में बयां कर रहे हैं.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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