समस्या. पुल िनर्माण कार्य पूरा होने की तिथि को बीते एक साल बावजूद पुल अधूरा
पुल की आधारशिला 11 फरवरी 2012 को रखी गयी थी और कार्य समाप्ति की तिथि 10 फरवरी 2014 को ही था.
टेढ़ागाछ : कहते हैं कि क्षेत्र के विकास की रीढ़ पुल व सड़कें होती हैं. इसी बुनियाद पर सरकारें पुल व सड़कों का निर्माण कार्य करवाकर अपने विकास कार्यों की उपलब्धियां गिनाती है. मगर देखा जाए तो शासन की अनदेखी का नतीजा है कि टेढ़गाछ और बहादुरगंज प्रखंड क्षेत्र के अति महत्वपूर्ण कौल नदी पर लौचा घाट में निर्माणाधीन उच्चस्तरीय आरसीसी पुल का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो सका है. जुरैल से लौचा पथ में बन रहे कोल नदी पर पुल का निर्माण कार्य कछुआ गति से चला हुआ है. ऐसे में टेढ़ागाछ वासी को बरसात से पहले पुल की सुविधा नहीं मिल पायेगी.
पुल की आधारशिला 11 फरवरी 2012 को रखी गयी थी और कार्य समाप्ति की तिथि10 फरवरी 2014 को ही था. करीब दो वर्षों से अधिक समय बीतने के बाद भी पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है. प्राक्कलित राशि 2934.72 लाख रुपये से बनने वाले पुल के निर्माण कार्य पूरा करने के लिए विभाग की ओर से ठेकेदार को एक साल का समय दिया गया था लेकिन निर्माण कार्य बड़ी धीमी गति से चलाया हुआ है. टेढ़ागाछ प्रखंड वासियों के लिए नाव ही सहारा है. नाव की यात्रा शौक नहीं इनकी मजबूरी है. इसके बिना इनका रोजमर्रा का काम भी पूरान नहीं हो पाता है. वर्ष के चार माह जब इनके प्रखंड पानी से घिर जाते हैं तो नदी पार करने के लिए नाव ही एकमात्र साधन है.
टेढ़ागाछ प्रखंड के लोगों को मिलेगी राहत
लौचा घाट पर पुल बनने से टेढ़ागाछ प्रखंड के लोग सीधे जिला मुख्यालय से जुड़ जायेंगे. आजादी के बाद आजतक टेढ़ागाछ प्रखंड जिला मुख्यालय से नहीं जुड़ पाया है. आज भी टेढ़ागाछ प्रखंड के लोग अररिया जिले के पलासी और जोकीहाट प्रखंड होते हुए जिला मुख्यालय आने को विवश है. टेढ़ागाछ गम्हरिया निवासी विनोद विश्वास का कहना है कि इस पुल के बन जाने से टेढ़गाछ-बहादुरगंज और जिला मुख्यालय की दूरी काफी कम हो जायेगी. लोगों को कचहरी, समाहरणालय और निबंधन कार्यालय आदि स्थानों पर आने-जाने में समय व दूरी दोनों की बचत होगी. साथ ही चचरी पुल व नाव पर आने-जाने से मुक्ति मिल जायेगी. पुल बनने से प्रखंड के सभी गांवों के लोग लाभान्वित होंगे.
नाव या चचरी पुल से गुजरना मजबूरी
टेढ़ागाछ प्रखंड के लोगों को नाव या चचरी पुल से गुजरना ही एक मात्र विकल्प है. लोग जान हथेली पर लेकर चचरी पुल पर सफर करते हैं. लौचा घाट पर पुल नहीं रहने से बरसात के समय नदी पार करना टेढ़ागाछ वासियों के लिए कठिन रहता है. बलराम विश्वास ने बताया कि सूखे में ग्रामीणों के सहयोग से बने चचरी पुल से आना-जाना होता है, लेकिन बरसात में जान जोखिम में डालकर नाव पर पार करना पड़ता है. इससे हर पल हादसे की आशंका बनी रहती है.
