एक मैसेज से मिलती थी अपराध और हादसों की सूचना, अब क्यों बंद पड़ गए WhatsApp सेनानी ग्रुप?

खगड़िया में पुलिस-पब्लिक संवाद के लिए बने व्हाट्सएप सेनानी ग्रुप वर्षों से निष्क्रिय हैं। लोगों ने पुलिस प्रशासन से इन्हें फिर से सक्रिय करने की मांग की है।

Khagaria News: डिजिटल दौर में पुलिस और जनता के बीच भरोसे का मजबूत जरिया बने WhatsApp सेनानी ग्रुप अब खगड़िया जिले में लगभग निष्क्रिय हो चुके हैं. कभी अपराध, सड़क हादसे, गुमशुदगी, आपदा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी सूचनाएं तत्काल साझा करने वाले ये ग्रुप अब महीनों से खामोश हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन्हें फिर से सक्रिय किया जाए तो पुलिस-पब्लिक संवाद मजबूत होगा और अपराध नियंत्रण से लेकर आपदा प्रबंधन तक में बड़ी मदद मिल सकती है.

कभी सूचना का सबसे तेज माध्यम थे WhatsApp सेनानी ग्रुप

जिला और थाना स्तर पर पुलिस प्रशासन की पहल पर बनाए गए इन ग्रुपों में थानाध्यक्ष, पुलिस पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, समाजसेवी, शिक्षक, व्यवसायी, पत्रकार और जागरूक नागरिकों को जोड़ा गया था. उद्देश्य था कि किसी भी आपात स्थिति, संदिग्ध गतिविधि, चोरी, गुमशुदगी, सड़क दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा की सूचना बिना देरी लोगों तक पहुंचे और आम नागरिक भी सीधे पुलिस को जानकारी दे सकें.

तबादलों के बाद बिखर गई पूरी व्यवस्था

समय के साथ कई थानों में अधिकारियों का तबादला हुआ, लेकिन नए अधिकारियों को ग्रुप से नहीं जोड़ा गया. कई पुराने सदस्य भी निष्क्रिय या बाहर हो गए. इसका असर यह हुआ कि अधिकांश WhatsApp सेनानी ग्रुप धीरे-धीरे बंद होते चले गए और पुलिस-पब्लिक संवाद की अहम कड़ी कमजोर पड़ गई.

लोग बोले, फिर शुरू हो डिजिटल पुलिसिंग

शहर के भाजपा नेता अंकित सिंह चंदेल का कहना है कि पहले ट्रैफिक, अपराध या अन्य घटनाओं की सूचना तुरंत मिल जाती थी, लेकिन अब महीनों तक कोई आधिकारिक संदेश नहीं आता. सामाजिक कार्यकर्ता एवं वार्ड पार्षद रणवीर कुमार ने कहा कि गुमशुदा लोगों की तलाश, अपराधियों की पहचान और आपदा के समय यह व्यवस्था बेहद कारगर साबित होती थी.

मोरकाही थाना क्षेत्र के निवासी राकेश पासवान ने भी कहा कि पहले संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत साझा हो जाती थी, जिससे पुलिस समय पर कार्रवाई कर पाती थी. अब ऐसी व्यवस्था लगभग समाप्त हो गई है.

Khagaria News: डिजिटल संवाद मजबूत करने की उठी मांग

स्थानीय लोगों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पुलिस और जनता के बीच भरोसा बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं. इसलिए जिले के सभी थाना स्तर के WhatsApp सेनानी ग्रुप की समीक्षा कर उन्हें दोबारा सक्रिय किया जाना चाहिए. नए थानाध्यक्ष, बीट पुलिस पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार, समाजसेवी और जिम्मेदार नागरिकों को जोड़कर नियमित रूप से जनहित की सूचनाएं साझा की जाएं, ताकि अपराध नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जनता की भागीदारी फिर से मजबूत हो सके.

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