चिराग पासवान की मां को घर से निकाल जड़ दिया ताला, इस बार नहीं है सियासी विवाद, जानें मामला

Chirag Paswan: पशुपति कुमार पारस के परिजनों ने राजकुमारी देवी की संपत्ति पर हक जताया और कमरों में ताला लगा दिया है.

Chirag Paswan: पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिवंगत रामविलास पासवान के परिवार में एक नया विवाद सामने आया है. इस बार का विवाद सियासी नहीं, बल्कि संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा हुआ है. यह विवाद रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी से जुड़ा है और इसमें उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस का नाम आ रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उनके रिलेटिव्स ने खगड़िया जिले के शहरबन्नी गांव स्थित राजकुमारी देवी के घर पर मालिकाना हक जताया है और कुछ कमरों में ताले लगा दिया है.

राजकुमारी देवी ने क्या आरोप लगाया

राजकुमारी देवी ने आरोप लगाया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस और रामचंद्र पासवान की पत्नी ने उन्हें घर से बाहर निकालने की कोशिश की है. इस मामले को लेकर उन्होंने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराया है. राजकुमारी देवी इस घटनाक्रम से आहत हैं.

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1960 में रामविलास पासवान से हुई थी शादी

चिराग पासवान के पिता राम विलास पासवान ने दो शादियां की थीं. ग्रामीण परिवेश से आने वाली राजकुमारी देवी से उन्होंने 1960 में शादी की थी. उस वक्त पासवान की उम्र सिर्फ 14 साल थी. शादी के कुछ साल बाद राम विलास पासवान ने राजकुमारी देवी को तलाक देकर साल 1983 में रीना शर्मा से दूसरी शादी कर ली थी. चिराग पासवान रीना शर्मा के ही पुत्र हैं. चिराग राजकुमारी देवी को भी अपनी मां मानते हैं. वह अक्सर अपनी मां से मिलने शहरबन्नी भी जाते हैं. पशुपति और रामचंद्र दोनों रामविलास पासवान के छोटे भाई हैं जिनसे राजकुमारी देवी का संपत्ति विवाद चल रहा है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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