खगड़िया: परबत्ता के खजरैठा राम मंदिर में 24 अगस्त से सजेगा भव्य झूलनोत्सव, चांदी के झूले पर विराजेंगे भगवान

खगड़िया के खजरैठा गांव में 24 अगस्त से पांच दिवसीय झूलनोत्सव का भव्य आयोजन हो रहा है. इस प्राचीन राम मंदिर में पहली बार चांदी के कलात्मक झूले पर भगवान श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी को झुलाया जाएगा. उत्सव के दौरान संगीत और भजनों की मनमोहक प्रस्तुति होगी.

खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत खजरैठा गांव स्थित अति प्राचीन भगवान श्री राम मंदिर में 24 से 28 अगस्त तक पांच दिवसीय पारंपरिक झूलनोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा. सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होने वाले इस पावन उत्सव को लेकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में अपार उत्साह है. मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा और फूलों से सजाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. उत्सव के दौरान चांदी के कलात्मक झूले पर भगवान श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं को विराजमान कर झूला झुलाया जाएगा.

विक्रम संवत 1969 में हुई थी मंदिर की स्थापना

पूर्व जिला परिषद सदस्य पंकज कुमार राय ने मंदिर के गौरवशाली इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि उनके पूर्वज स्व. गोपाल राय ने विक्रम संवत 1969 में इस भव्य मंदिर की नींव रखी थी.

उस समय अयोध्या से पधारे विद्वान संत पंडित राम दास जी के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई थी. वर्ष 1957 में गंगा नदी में आई प्रलयंकारी बाढ़ के दौरान पूरा गांव और मंदिर का मूल ढांचा जलमग्न हो गया था. इसके बाद स्व. छेदी प्रसाद राय एवं स्व. लक्ष्मी नारायण राय के अथक प्रयासों से मंदिर भवन का पुनर्निर्माण कराया गया और नियमित पूजा पुनः आरंभ हुई. मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी, लक्ष्मी नारायण, भगवान विष्णु और शालिग्राम जी की दुर्लभ प्रतिमाएं स्थापित हैं.

चांदी के झूले पर पीढ़ियों से निभाई जा रही परंपरा

स्व. गोपाल राय के वंशज आज भी इस सदियों पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का निर्वहन पूरी निष्ठा व श्रद्धा के साथ कर रहे हैं. श्रावण मास में भगवान को चांदी के भारी-भरकम झूले में झुलाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. इस अवसर पर दूर-दराज से श्रद्धालु राम दरबार को झूला झुलाकर पुण्य अर्जित करने पहुंचते हैं. इस मंदिर में झूलनोत्सव के अलावा रामनवमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा और अन्नकूट जैसे पर्वों पर भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं.

5 दिनों तक बहेगी संगीत और भजनों की त्रिवेणी

झूलनोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन सुबह-शाम विशेष आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा:

  • 24 अगस्त (पहला दिन): उद्घाटन अवसर पर संगीत कलाकार मालिक झा अपने सहयोगियों के साथ पारंपरिक गायन और वादन की मनमोहक प्रस्तुति देंगे.
  • 25 से 28 अगस्त: अंग क्षेत्र के सुप्रसिद्ध भजन गायक मनीष कुमार मानस अपनी संगीत मंडली के साथ प्रभु श्री राम और श्री कृष्ण के भजनों की रसगंगा बहाएंगे.
  • प्रतिदिन संध्या आरती के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच विशेष महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा.

अयोध्या के मणि पर्वत से जुड़ा है झूलनोत्सव का पौराणिक रहस्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन माह में झूला झुलाने की यह पावन परंपरा त्रेता युग से जुड़ी हुई है. माना जाता है कि 14 वर्ष के वनवास से लौटने के बाद माता जानकी ने हरे-भरे वनों और पर्वतों पर विचरण की इच्छा जताई थी. भगवान श्री राम के निर्देश पर पक्षीराज गरुड़ ने अयोध्या में मणियों से युक्त 'मणि पर्वत' का निर्माण किया था, जहां सावन के महीने में माता सीता और प्रभु श्री राम के लिए झूला डाला जाता था. इसी पौराणिक स्मृति में हर वर्ष सावन शुक्ल एकादशी से झूलनोत्सव मनाने की परंपरा आज भी जीवंत है.


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By Amarjeet kumar

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