परबत्ता माधवपुर पंचायत निवासी कटिमन सिंह का राजधानी एक्सप्रेस चर्चित घोड़ा मंगलवार को मुंगेर में आयोजित घुड़दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. मैदान में उतरते ही ‘राजधानी एक्सप्रेस’ का अंदाज कुछ ऐसा होता है कि प्रतिद्वंदी घोड़े पीछे छूटते नजर आते हैं. 17 वर्षीय यह अनुभवी घोड़ा अब तक बिहार के विभिन्न जिलों में आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर 30 से अधिक शील्ड अपने नाम कर चुका है. इसकी तेज रफ्तार, संतुलित चाल और अनुशासित प्रदर्शन दर्शकों के साथ-साथ निर्णायकों को भी अचंभित कर देता है. इस घोड़े से जुड़ी एक बेहद रोचक बात यह भी है कि मानो इसे प्रतियोगिता का पूर्वाभास हो जाता है. बताया जाता है कि रेस से दो-तीन दिन पहले ही यह खुद ही अपना खाना कम कर देता है, जैसे वह खुद को बड़ी चुनौती के लिए तैयार कर रहा हो. घोड़े के मालिक कटिमन सिंह बताते हैं कि ‘राजधानी एक्सप्रेस’ की ताकत और फुर्ती का मुकाबला करना आसान नहीं है. यही वजह है कि यह घोड़ा अब सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि राजपूती परंपरा, कड़ी मेहनत और अनुशासन का प्रतीक बन चुका है. इसकी सवारी खुद उनके पुत्र बाबू साहब करते हैं, जिनकी जोड़ी मैदान में उतरते ही जीत की गारंटी मानी जाती है. मुंगेर की इस जीत के साथ ही ‘राजधानी एक्सप्रेस’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ नाम ही नहीं, बल्कि रफ्तार का असली बादशाह है। सामाजिक कार्यकर्ता लाल रतन सिंह ने कहा की राजधानी एक्सप्रेस घोड़े का कोई जोर नहीं है. मैदान में उतरते ही सभी को छक्के छुड़ा देता है. असली बादशाह है. सामाजिक कार्यकर्ता लाल रतन सिंह ने भी इसकी तारीफ करते हुए कहा कि मैदान में उतरते ही यह घोड़ा सभी को पीछे छोड़ देता है. राजपूती इतिहास में घोड़े की अहम भूमिका रही है. जिसका सबसे बड़ा उदाहरण महाराणा प्रताप और उनका प्रिय घोड़ा चेतक रहा. आज उसी परंपरा की झलक ‘राजधानी एक्सप्रेस’ में देखने को मिल रही है, जो अपनी रफ्तार और दमखम से हर रेस में नया इतिहास रच रहा.
मुंगेर की रेस में परबत्ता माधवपुर का घोड़ा बना चैम्पियन

मुंगेर की रेस में परबत्ता माधवपुर का घोड़ा बना चैम्पियन
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माधवपुर पंचायत निवासी कटिमन सिंह का राजधानी एक्सप्रेस चर्चित घोड़ा मंगलवार को मुंगेर में आयोजित घुड़दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया