Kosi River Erosion : खगड़िया के बेलदौर प्रखंड में कोसी नदी के लगातार बदलते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों की चिंता बढ़ा दी है. इतमादी पंचायत के बारुण गांव के समीप जमींदारी बांध से करीब 50 मीटर की दूरी पर तेज कटाव हो रहा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कटाव रोधी कार्य शुरू कराया है, लेकिन ग्रामीणों ने कार्य की गुणवत्ता और गति पर सवाल खड़े किए हैं.
जमींदारी बांध के करीब पहुंचा कोसी का कटाव
कोसी नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण बारुण गांव के समीप कटाव तेज हो गया है. नदी का बहाव जमींदारी बांध से महज 50 मीटर की दूरी तक पहुंच चुका है, जिससे बांध की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है. यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आसपास के गांवों पर भी खतरा मंडरा सकता है.
प्रशासन ने शुरू कराया कटाव रोधी कार्य
कटाव की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गुरुवार से एंटी इरोजन कार्य शुरू करा दिया है. इसके तहत मां परमेश्वरी कंस्ट्रक्शन और अमित कुमार नामक एजेंसियों को 20-20 मीटर क्षेत्र में नायलॉन क्रेट तथा 35-35 मीटर क्षेत्र में बंबू रोल लगाने की जिम्मेदारी दी गई है. विभाग का दावा है कि इससे कटाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है.
ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नायलॉन क्रेट को नदी की गहराई में स्थापित करने के बजाय उथले किनारों पर रखा जा रहा है, जिससे कटाव पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है. उनका कहना है कि तेज बहाव के कारण मिट्टी से भरी सैकड़ों बोरियां नदी में बह चुकी हैं और एंकर भी क्षतिग्रस्त हो गया है. ग्रामीणों के अनुसार कार्य की गुणवत्ता और गति दोनों संतोषजनक नहीं हैं.
कनीय अभियंता ने दिया आश्वासन
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2 के कनीय अभियंता नवनीत दास ने बताया कि क्षतिग्रस्त एंकर को सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी विभाग के वरीय अधिकारियों को भेज दी गई है और निर्देश मिलते ही आवश्यक अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी.
ग्रामीणों ने तेज और गुणवत्तापूर्ण कार्य की उठाई मांग
तटवर्ती गांवों के लोगों ने विभाग से कटाव रोधी कार्य में तेजी लाने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जमींदारी बांध और आसपास के गांव गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं.
