खगड़िया के बेलदौर में एंबुलेंस व्यवस्था पर सवाल, 3 लाख आबादी और सिर्फ 2 एंबुलेंस, 3 युवकों की मौत

एनएच-107 पर हुए सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत के बाद बेलदौर की स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में है. परिजनों का आरोप है कि रेफर किए गए गंभीर घायलों को एंबुलेंस में ऑक्सीजन जैसी जीवनरक्षक सुविधाएँ नहीं दी गईं, जिससे उनकी जान चली गई.

Khagaria News: रविवार की रात उसराहा गांव के समीप एनएच-107 पर हुए हादसे में तीन युवकों की मौत के बाद बेलदौर की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों का आक्रोश सामने आया है. मृतकों के परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि गंभीर हालत में रेफर किये गये मरीजों को एंबुलेंस में ले जाते समय जरूरी जीवनरक्षक सहायता नहीं दी गयी. खास तौर पर एंबुलेंस में ऑक्सीजन उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को ऑक्सीजन मास्क नहीं लगाने का आरोप लगाया गया है.

हादसे के बाद शुरू हुई जिंदगी बचाने की जद्दोजहद

हादसे में बेलदौर निवासी रूपेश उर्फ काजू, सकरोहर पंचायत के पिपराबासा निवासी चंदेश्वर सिंह के पुत्र नीरज और पंकज सिंह के पुत्र नीतिश गंभीर रूप से घायल हुए थे. उनकी हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उच्च संस्थान रेफर किया गया.

परिजनों के मुताबिक एंबुलेंस को सूचना दी गयी थी, लेकिन कर्मियों के घटनास्थल पर पहुंचने में देर हुई. गंभीर घायलों को एंबुलेंस में चढ़ाने के बाद परिजनों को उम्मीद थी कि अब उन्हें जल्द से जल्द बेहतर इलाज मिल सकेगा.

लेकिन आरोप है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन समेत अन्य जीवनरक्षक संसाधन मौजूद होने के बावजूद तीनों घायलों को तत्काल ऑक्सीजन नहीं दी गयी.

एंबुलेंस में ही नीरज ने तोड़ा दम

परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस चालक सौरभ कुमार और ईएमटी दीपक कुमार ने गंभीर रूप से घायल मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन देने की जरूरत नहीं समझी.

इसके कुछ ही देर बाद नीरज ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया. नीतिश की मौत करूआमोड़ पहुंचते-पहुंचते हो गयी. वहीं, रूपेश उर्फ काजू ने महेशखूंट पहुंचने तक दम तोड़ दिया.

तीनों परिवारों के लिए यह सफर अस्पताल पहुंचने से पहले ही जिंदगी और मौत की आखिरी लड़ाई बन गया. हादसे में अपनों को खोने के बाद परिजनों का गुस्सा अब स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर भी फूट रहा है.

हालांकि, मरीजों की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और एंबुलेंस कर्मियों की कथित लापरवाही का इसमें कितना योगदान रहा, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

तीन लाख की आबादी, भरोसा सिर्फ दो एंबुलेंस पर

बेलदौर प्रखंड में करीब तीन लाख की आबादी के लिए सीएचसी प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है. गंभीर मरीजों को अक्सर बेहतर इलाज के लिए दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है. ऐसे में एंबुलेंस सेवा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.

ग्रामीणों के अनुसार, इतने बड़े इलाके की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए सीएचसी बेलदौर में महज दो एंबुलेंस पर निर्भरता है. इनमें एक एंबुलेंस चौथम सीएचसी की ओर से उपलब्ध करायी गयी है, जबकि दूसरी एंबुलेंस आउटसोर्स के माध्यम से संचालित हो रही है.

यही व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है.

ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर एंबुलेंस संचालन में मनमानी के कारण गंभीर मरीजों को समय पर जरूरी सुविधा नहीं मिल पाती. रेफर मरीजों के लिए अस्पताल से उच्च संस्थान तक की दूरी ऐसे में और जोखिम भरी हो जाती है.

रेफर मरीज के लिए हर मिनट क्यों है अहम?

गंभीर सड़क हादसे, सिर में चोट, अत्यधिक रक्तस्राव या सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों के लिए अस्पताल तक पहुंचने का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. ऐसे मामलों में एंबुलेंस केवल मरीज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का साधन नहीं होती, बल्कि वह अस्पताल पहुंचने से पहले की महत्वपूर्ण चिकित्सा कड़ी होती है.

इसी वजह से बेलदौर की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों का सवाल है कि यदि एंबुलेंस में ऑक्सीजन और अन्य जरूरी संसाधन मौजूद हैं, तो उनका इस्तेमाल कब और किस स्थिति में किया जाता है? गंभीर मरीजों को रेफर करते समय चालक और ईएमटी की जिम्मेदारी क्या तय है? और यदि किसी मरीज की हालत रास्ते में बिगड़ती है, तो तत्काल जीवनरक्षक सहायता देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही पर भी नजर

घटना के बाद अब सिर्फ एंबुलेंस कर्मियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं. एंबुलेंस के संचालन, कर्मचारियों की ड्यूटी, ऑक्सीजन और अन्य जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता तथा उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया की जांच जरूरी मानी जा रही है.

सीएचसी प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि एंबुलेंस संचालन में लापरवाही की शिकायत मिली है. उन्होंने कहा कि मामले से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जायेगा और संबंधित कर्मियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया जायेगा.

अब लोगों की नजर इस बात पर है कि शिकायत के बाद जांच कितनी जल्दी शुरू होती है और क्या जिम्मेदारी तय की जाती है.

Khagaria News: सवाल सिर्फ तीन मौतों का नहीं, पूरी व्यवस्था का है

बेलदौर जैसे बड़े प्रखंड में जहां बड़ी आबादी गंभीर मरीजों के इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है, वहां एंबुलेंस सेवा की छोटी-सी चूक भी किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन सकती है.

रविवार रात तीन युवकों की मौत के बाद यही सवाल सबसे बड़ा है कि अगर मरीजों को समय पर एंबुलेंस मिली, तो क्या उन्हें रास्ते में जरूरी चिकित्सा सहायता भी मिली? अगर एंबुलेंस में ऑक्सीजन उपलब्ध थी, तो उसे मरीजों को क्यों नहीं लगाया गया, यह जांच का विषय है.

फिलहाल तीन परिवार अपनों को खो चुके हैं. स्थानीय लोगों में नाराजगी है और स्वास्थ्य विभाग ने जांच तथा कार्रवाई का आश्वासन दिया है. अब देखना यह है कि जांच में क्या सामने आता है और बेलदौर की एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का जवाब कब मिलता है.


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By Amit kumar singh

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