खगड़िया. शहर के परमानंदपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित छह दिवसीय रोजगारपरक मछली पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया. समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले किसानों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये. प्रशिक्षण में गोगरी, परबत्ता, बेलदौर और अलौली प्रखंडों से आये दर्जनों किसानों ने भाग लिया.
प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से मत्स्य पालन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में टिकाऊ वृद्धि के लिए उन्हें जरूरी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना था.
कम लागत में बेहतर आमदनी का जरिया है मत्स्य पालन
प्रशिक्षण सत्र के दौरान जिला मत्स्य प्रसार पदाधिकारी सह प्रशिक्षक विक्रम कुमार और अवधेश कुमार ने किसानों को मत्स्य पालन के व्यावसायिक पहलुओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कम लागत और सीमित संसाधनों में भी वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन कर बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है.
उन्होंने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन को जोड़कर उपलब्ध भूमि और जल संसाधनों का बहुआयामी उपयोग किया जा सकता है. बाजार में मछली की मांग लगातार बनी रहने के कारण किसानों के लिए नियमित आय का अवसर भी उपलब्ध हो सकता है.
सजावटी मछली पालन से स्वरोजगार की संभावना
मत्स्य प्रसार पदाधिकारी सह प्रशिक्षिका श्वेतांशुमाला ने रंगीन एवं सजावटी मछली पालन के व्यावसायिक अवसरों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सजावटी मत्स्य पालन ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बन सकता है. कम जगह में भी इस व्यवसाय की शुरुआत कर आय का स्रोत विकसित किया जा सकता है.
किसानों को नर्सरी और तालाब प्रबंधन की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मछली पालन की पूरी प्रक्रिया की व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी दी गयी. इसमें नर्सरी प्रबंधन, उपयुक्त तालाब का चयन और निर्माण, पानी की गुणवत्ता के आवश्यक मानक तथा तालाब के वैज्ञानिक उपचार की जानकारी शामिल रही.
इसके अलावा प्राकृतिक आहार के संवर्धन, कीट और परभक्षी जीवों से मछलियों की सुरक्षा, खाद एवं उर्वरक के संतुलित उपयोग और पूरक आहार देने की सही विधि के बारे में भी विस्तार से बताया गया.
उत्पादन बढ़ाने के लिए सुरक्षा उपायों पर जोर
प्रशिक्षकों ने किसानों को सुरक्षा जाल के प्रभावी उपयोग और मछलियों के बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन के साथ लाभ को भी बढ़ाया जा सकता है.
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक रहे मौजूद
समापन समारोह में कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ. एनके सिंह, उद्यान वैज्ञानिक रूपम रानी, इंजीनियर धनंजय पासवान सहित अन्य लोग मौजूद रहे. अधिकारियों ने प्रशिक्षण से प्राप्त तकनीकी जानकारी का उपयोग करते हुए किसानों से वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करने की अपील की.
