Khagaria News: खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड में मत्स्य किसानों के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित किया गया. कोसी सहजीवन परियोजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को बताया गया कि मछली बीज डालने से पहले तालाब की वैज्ञानिक तैयारी क्यों जरूरी है और इससे उत्पादन, मछलियों की जीवित रहने की क्षमता तथा किसानों की आमदनी पर क्या असर पड़ता है. प्रशिक्षण में 38 मत्स्य किसानों ने भाग लेकर विशेषज्ञों से आधुनिक तकनीकें सीखीं और अपनी समस्याओं का समाधान भी जाना.
कोसी सहजीवन परियोजना के तहत आयोजित हुआ तकनीकी प्रशिक्षण
खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय, मछरा लहटोरवा में सेंटर फॉर एक्वाटिक लाइवलीहुड जलजीविका द्वारा संचालित कोसी सहजीवन परियोजना के तहत मत्स्य किसानों के लिए एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित किया गया.
प्रशिक्षण का विषय "मत्स्य बीज संचयन पूर्व तालाब प्रबंधन" रखा गया. इसका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों से जोड़ना, उत्पादन बढ़ाना और मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाना था.
कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्लॉक प्रबंधक दीपक राज हंस ने की, जबकि तकनीकी प्रशिक्षण प्रशिक्षक नीरज कुमार वर्मा ने दिया.
38 किसानों ने सीखी वैज्ञानिक मत्स्य पालन की तकनीक
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 38 मत्स्य किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
प्रशिक्षण की शुरुआत प्रतिभागियों के पूर्व मूल्यांकन से की गई, ताकि उनकी जानकारी के स्तर को समझा जा सके. इसके बाद विशेषज्ञों ने तालाब तैयार करने की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया.
विशेषज्ञों ने बताया कि यदि बीज संचयन से पहले तालाब का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो मछलियों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है.
तालाब की तैयारी के हर चरण की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को तालाब प्रबंधन के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई.
इसमें तालाब की सफाई और सुखाई, अवांछित एवं हिंसक मछलियों का उन्मूलन, जलीय खरपतवार नियंत्रण, चूना और ब्लीचिंग पाउडर का वैज्ञानिक उपयोग, जल की गुणवत्ता बनाए रखना, उर्वरीकरण तथा प्राकृतिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे विषय विस्तार से समझाए गए.
विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों को अपनाने से मछली बीजों की जीवित रहने की क्षमता बढ़ती है और रोगों का खतरा भी कम होता है.
वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन और मुनाफा
प्रशिक्षक नीरज कुमार वर्मा ने कहा कि सफल मत्स्य पालन की शुरुआत तालाब की वैज्ञानिक तैयारी से होती है.
उन्होंने किसानों को बताया कि तकनीकी मानकों का पालन करने से मछलियों की बेहतर वृद्धि होती है, उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में भी सुधार आता है. साथ ही अनावश्यक नुकसान और रोगों की संभावना भी कम हो जाती है.
यह प्रशिक्षण केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों को व्यावहारिक खेती के बेहतर तरीके अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया.
किसानों ने साझा की समस्याएं, विशेषज्ञों ने दिए समाधान
प्रशिक्षण के दौरान किसानों और विशेषज्ञों के बीच खुला संवाद भी आयोजित किया गया.
इस दौरान किसानों ने मत्स्य पालन से जुड़ी अपनी स्थानीय समस्याएं साझा कीं. विशेषज्ञों ने उनके सवालों के जवाब देते हुए व्यावहारिक समाधान बताए और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी.
प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करने और अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं. किसानों ने भविष्य में भी इस तरह के तकनीकी प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की.
Khagaria News: ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल
कोसी सहजीवन परियोजना के तहत आयोजित इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन को अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाते हैं तो कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सकता है. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर आजीविका को भी मजबूती मिलेगी.
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