भरोसा नहीं करते उस दीवार से जो खून पीकर बनी है

डॉ सुनील कुमार मिश्र ने कहा कि भरोसा नहीं करते उस दीवार से जो खून पीकर बनी है. शंकरानंद ने सीढ़ियां शीर्षक कविता में कहा जो ईंट और गारे की तरह खप रहे हैं. सीढ़ियां बनकर/उनकी जिंदगी कुचली जाती है रोज. अनुभूति ने कहा कि आओ बिहार को सुंदर बिहार बनाते हैं.

खगड़िया. हिन्दी भाषा साहित्य परिषद की बैठक सह कवि गोष्ठी परिषद कार्यालय कृष्णा नगर में हुयी. बैठक की अध्यक्षता अशोक कुमार चौधरी ने की. कार्यक्रम का संचालन शंकरानंद ने किया. जबकि मुख्य अतिथि चेन्नई के प्रसिद्ध कवि गीतकार डॉ. ईश्वर करुण थे. कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए डॉ ईश्वर करुण ने कहा कि नेह के नगर में विश्वास की धरोहर/लुटने न पाए कभी मीत इसे देखना/मिटने न पाए. कभी कोयल की चेतना. ललिता कुमारी ने व्योम की ओर शीर्षक कविता में कहा कि ओ पंछी तोड़ दो पिंजरे की डोर/उड़ चलो व्योम की ओर. डॉ सोहन कुमार सिन्हा ने कहा कि मुफलिसी के वे सुनहरे दिन/ रिक्त और फटेहाल था/खूब मालामाल था. राजेन्द्र राजेश ने कहा कि तुम्हारी मुस्कराहट देखी तो जाना रोशनी क्या है. रामकृष्ण आनंद ने अनुत्तरित प्रश्न शीर्षक में कहा न जाने कौन सी चीज थी /कितनी अच्छी लगती थी. हर चीज दुनिया की. डॉ सुनील कुमार मिश्र ने कहा कि भरोसा नहीं करते उस दीवार से जो खून पीकर बनी है. शंकरानंद ने सीढ़ियां शीर्षक कविता में कहा जो ईंट और गारे की तरह खप रहे हैं. सीढ़ियां बनकर/उनकी जिंदगी कुचली जाती है रोज. अनुभूति ने कहा कि आओ बिहार को सुंदर बिहार बनाते हैं. घर घर ज्ञान का संदेश पहुंचाते हैं. डॉ पुष्पा कुमारी ने कहा कि केना होयते गरीबों के कल्याण हे बहिना/भ्रष्ट छै दुनिया जहान. संध्या किंकर ने कहा कि सारे जख्म पर नमक लगा दिया. शशि शेखर ने कहा कि भागते भागते जिंदगी में कभी तो रुक लेना. अशोक कुमार चौधरी ने कहा कि जे भोजन दै दुनिया के/ गाली दै ओकरे कनिया के.

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By Rajkishore singh

राजकिशोर सिंह प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. अभी प्रभात खबर के खगड़िया कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति, राजनीति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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