बेलदौर. प्रखंड क्षेत्र के महिनाथ नगर गांव में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग में आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा बह रही है. जानकारी के मुताबिक बुधवार को सत्संग के पहले दिन संतमत सत्संग के प्रधान आचार्य स्वामी चतुरानंद महाराज ने सत्संग प्रेमियों को संबोधित करते हुए प्रतिपाद के विषय मानव शरीर के महत्ता के गुढ रहस्य बताये इन्होंने बताया कि 84 लाख योनियों में मानव शरीर दुर्लभ है, सत्कर्म के फलस्वरूप ही जीव मानव शरीर 84 लाख योनियों में भटकने के बाद प्राप्त होता है. इसे सभी जीवो से अधिक सुंदर सोचने, समझने वाला बताते हुए इन्होंने कहा कि मानव शरीर से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है. इन्होंने इस मानव शरीर से बुरा कर्म को छोड़कर अच्छाई को अपनाने की सलाह दी, इन्होंने बताया कि मानव रूपी शरीर सुख भोगने के लिए नहीं बल्कि ईश्वर भक्ति के लिए मिला है। ईश्वर भक्ति के माध्यम से जीवन के भवसागर रुपी सांसारिक दुनिया से पार कर सकते हैं इन्होंने कहा कि जीवन में किए गए अच्छे व बुरे कर्मों का फल भोगना पड़ता है इसलिए सदैव लोगों से अच्छे आचरण व्यवहार व ईमानदारी, दया भाव रखकर जरूरत मंद का सहयोग करना चाहिए पंच पापों को त्याग कर सच्चे सद्गुरु की शरण में जाकर सत्संग ध्यान करनी चाहिए वहीं स्वामी आत्मानंद महाराज ने शरीर को दुःख का घर करार देते हुए कहा इसलिए जीवन में सुख दुःख लगा रहता है. जहां पंच तत्व मिट्टी जल वायु अग्नि से मिलकर मानव शरीर बना है इसलिए मानव शरीर से ज्ञान को पाना आवश्यक बताया. विदित हो कि महिनाथ नगर गांव निवासी सेवानिवृत शिक्षक विद्यानंद सिंह के गृह प्रवेश के अवसर पर दो दिवसीय संतमत सत्संग का आयोजन किया जा रहा है जिसमें दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सत्संग की ज्ञान रूपी गंगा में डुबकी लगा रहे हैं. मौके पर सेवानिवृत शिक्षक अमरनाथ सिंह, सुजीत सिंह, नागेश्वर मंडल, सुरेंद्र पासवान, राजेंद्र मंडल, संजय सिंह, अजय सिंह समेत दर्जनों सत्संग प्रेमी मौजूद थे.
84 लाख योनियों में मानव तन दुर्लभ, बड़े भाग्य मानुष तन पावा : आचार्य स्वामी चतुरानंद महाराज
सत्कर्म के फलस्वरूप ही जीव मानव शरीर 84 लाख योनियों में भटकने के बाद प्राप्त होता है
