सैनिक सम्मान के साथ कारगील योद्धा नायक परमानंद सिंह पंचतत्व में हुए विलिन

कारगिल युद्ध के दौरान परमानंद सिंह ने दुश्मनों के खिलाफ मोर्चे पर डटकर लड़ाई लड़ी थी.

अगुवानी गंगा घाट पर दिया गया गॉड ऑफ ऑनर परबत्ता. सैनिक सम्मान के साथ कारगिल युद्ध के वीर योद्धा परमानंद सिंह पंचतत्व में विलिन हो गए. इससे पहले बुधवार को अगुवानी गंगा घाट पर भारतीय सेना के पूर्व नायक परमानंद सिंह को गॉड ऑफ ऑनर दिया गया. गंगा घाट पर भारत माता की जय और “वीर सपूत अमर रहें के नारे गूंज उठे. घाट पर हजारों लोगों ने वीर सपूत को आखिरी सलामी दी. बताया जाता है कि गांधीनगर पसराहा निवासी भारतीय सेना के पूर्व नायक परमानंद सिंह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे. लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. निधन की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गयी. लोग उन्हें सिर्फ एक पूर्व सैनिक नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और साहस की जीवंत मिसाल मानते थे. कारगिल युद्ध के दौरान परमानंद सिंह ने दुश्मनों के खिलाफ मोर्चे पर डटकर लड़ाई लड़ी थी. बर्फीली चोटियों पर गोलियों की बारिश के बीच उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देकर भारतीय सेना का मान बढ़ाया था. सेना में उनका जीवन अनुशासन, त्याग और देशसेवा का प्रतीक रहा. रिटायरमेंट के बाद भी वे युवाओं को सेना में जाने और देश सेवा के लिए प्रेरित करते रहे थे. उनके बड़े पुत्र राजीव रंजन भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होकर पिता की परंपरा को आगे बढ़ा चुके हैं, जबकि दूसरे पुत्र धीरज कुमार सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. छोटे भाई पूर्व सूबेदार धनिक लाल सिंह ने कहा कि परमानंद सिंह का जीवन राष्ट्र के नाम समर्पित था. वहीं बड़े भाई अधिक लाल सिंह ने उन्हें मिट्टी का सच्चा सपूत बताया.

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