Khagaria Nag Panchami: नाग पंचमी के अवसर पर परबत्ता प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में स्थित मां विषहरी और भगवती मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. मंदिर परिसरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी, जो देर शाम तक जारी रही. लोगों ने सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना को लेकर मां के दरबार में पूजा की.
मुरादपुर में मां भगवती मंदिर में विशेष पूजा
माधवपुर पंचायत के मुरादपुर गांव स्थित मां भगवती मंदिर में नाग पंचमी को लेकर विशेष पूजा-अर्चना की गई. यहां सदियों से विशेष पूजन के साथ बलि प्रदान, ब्राह्मण एवं कुंवारी भोजन कराने की परंपरा चली आ रही है. ग्रामीणों के बीच मंदिर को लेकर कई धार्मिक किंवदंतियां भी प्रचलित हैं.श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना पूरी होती है. मंदिर की पूजा-पाठ और देखरेख की जिम्मेदारी विश्वकर्मा समाज के लोग संभालते हैं.
तीसरी बार हुआ मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार
ग्रामीणों के अनुसार प्रारंभ में यह मंदिर मिट्टी और खपरैल का हुआ करता था. बाद में मां के एक भक्त को स्वप्न में मंदिर को भव्य और व्यवस्थित स्वरूप देने की प्रेरणा मिली. मंदिर के पुनर्निर्माण के दौरान सर्प निकलने की घटना को ग्रामीण आज भी आस्था से जोड़कर देखते हैं.वर्तमान में मंदिर भवन और परिसर आकर्षक स्वरूप ले चुका है. नाग पंचमी के अवसर पर आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे.
डुमरिया बुजुर्ग में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सियादतपुर अगुआनी पंचायत के डुमरिया बुजुर्ग गांव स्थित अतिप्राचीन मां विषहरी मंदिर में भी नाग पंचमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही. मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ फुलाईस, ब्राह्मण एवं कुंवारी भोजन की वर्षों पुरानी परंपरा निभाई गई.मंदिर के पंडित संतोष झा ने बताया कि मां विषहरी के दरबार में दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं.
बिशौनी में महाप्रसाद और भजन-कीर्तन
Khagaria Nag Panchami: लगार पंचायत के बिशौनी गांव में अगुआनी-नारायणपुर जीएन बांध से सटे मां विषहरी मंदिर में भी नाग पंचमी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई. यहां विशेष पूजा-अर्चना, फुलाईस, ब्राह्मण एवं कुंवारी भोजन के बाद महाप्रसाद का वितरण किया गया.संध्या समय भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ. पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और मां विषहरी के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा.
