कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ बेलदौर प्रखंड क्षेत्र के बलैठा पंचायत स्थित पचाठ के मुनि टोला में कटाव का खतरा लगातार गहराता जा रहा है. नदी की तेज धारा तेजी से मैदानी हिस्से को काटते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है. कटाव के मुहाने पर एक दर्जन से अधिक परिवारों के घर खड़े हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों ने कटाव निरोधी कार्य के नाम पर खानापूर्ति किए जाने का आरोप लगाया है.
नदी की तेज धारा आबादी की ओर बढ़ी
कटाव प्रभावित लोगों के अनुसार, जलस्तर बढ़ने के बाद कोसी की धारा पहले से ज्यादा उग्र हो गयी है. नदी तेजी से जमीन काट रही है और अब आबादी की ओर बढ़ती जा रही है. राधा देवी, नूतन देवी, नकुल मुनि समेत करीब एक दर्जन परिवारों के घर कटाव के बिल्कुल मुहाने पर पहुंच चुके हैं. ग्रामीणों को डर है कि अगर कटाव की रफ्तार नहीं थमी तो नदी कभी भी उनके घरों को अपने आगोश में ले सकती है.
आठ सितंबर से शुरू हुआ कटाव निरोधी काम
बताया जाता है कि बाढ़ प्रमंडल-2 की ओर से आठ सितंबर को मुनि टोला में कटाव निरोधी कार्य शुरू कराया गया था. कार्य में पांच दर्जन से अधिक मजदूर लगाए जाने की बात कही गयी थी. लेकिन नौ सितंबर को कटाव स्थल के निरीक्षण के दौरान मौके पर महज आठ से दस मजदूर ही बोरे में मिट्टी भरने का काम करते मिले.
ग्रामीणों के अनुसार, मौके पर जेई नवनीत दास समेत अन्य कर्मी भी मौजूद नहीं थे. इससे लोगों में विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है.
150 मीटर क्षेत्र में कटाव, काम का हिस्सा नदी में समाया
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 150 मीटर क्षेत्र में कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है. लेकिन तेज नदी धारा के कारण 20 फीट से अधिक हिस्सा पहले ही पानी में समा चुका है. इसके बावजूद कटाव रोकने के लिए मजबूत और प्रभावी उपाय नहीं किए जा रहे हैं. लोगों का आरोप है कि केवल मिट्टी से भरे बोरे डालने से तेज धारा के सामने कटाव को रोकना मुश्किल है.
बंबू रोल और बोल्डर पिचिंग की मांग
मौके पर मौजूद नकुल मुनि ने कहा कि कटाव पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बंबू रोल, बेडवार और बोल्डर पिचिंग जैसे ठोस उपाय किए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि सिर्फ मिट्टी से भरे बोरे डालने से तेज धारा को रोकना संभव नहीं है. यदि समय रहते मजबूत निरोधी कार्य नहीं कराया गया तो कई परिवारों के घर नदी में समा सकते हैं.
राहत के नाम पर सिर्फ प्लास्टिक शीट मिलने की शिकायत
नकुल मुनि ने प्रशासन पर राहत के नाम पर सिर्फ प्लास्टिक शीट उपलब्ध कराने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को अब तक सूखा राशन भी नहीं मिला है. ऐसे में कटाव की मार झेल रहे परिवारों के सामने भोजन-पानी का संकट भी पैदा हो गया है.
ग्रामीणों ने युद्धस्तर पर काम की मांग की
कटाव के बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. लोगों का कहना है कि नदी की धारा लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है, इसलिए औपचारिकता के बजाय युद्धस्तर पर मजबूत कटाव निरोधी कार्य कराया जाना चाहिए. साथ ही प्रभावित परिवारों को तत्काल सूखा राशन और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की गयी है.
