मानव शरीर पंचभुतों से बना एक दुर्लभ मंदिर - संत सुबोध बाबा

उक्त बातें रविवार को नपं के स्थानीय खर्राबासा गांव में आयोजित मासिक सत्संग में कुप्पाघाट से पधारे संत सुबोध बाबा ने कही

बेलदौर. मानव शरीर पंचभूतों से बना एक दुर्लभ मंदिर है जो आत्मा का वास स्थल है. उक्त बातें रविवार को नपं के स्थानीय खर्राबासा गांव में आयोजित मासिक सत्संग में कुप्पाघाट से पधारे संत सुबोध बाबा ने कही. उक्त सत्संग का आयोजन खर्राबासा गांव में सत्संग प्रेमी जोगेंद्र दास के अगुवाई में संपन्न हुई. वहीं सत्संग के दौरान इन्होंने आत्मा के ईश्वरीय स्वरूप का वर्णन करते बताया कि मानव शरीर में रहकर ही जीव सत्कर्म करते ईश्वर की प्राप्ति कर सकता है, इन्होंने बताया कि यह एक रथ के समान है जिसका स्वामी आत्मा चालक ,बुद्धि लगाम और इंद्रियां घोड़े के रूप में होती हैं. जिसे गुरु के मार्गदर्शन में ईश्वर भक्ति और साधना से ही सफल किया जा सकता है, वरना यह 84 हजार योनियों में भटक जाता है. वहीं भक्ति और साधना द्वारा परमात्मा को पाना है, क्योंकि इसी से ईश्वर साक्षात्कार संभव है. इन्होंने सत्कर्म पर चलने का मार्ग बताते कहा कि सत्संग प्रेमियों के लिए मानव शरीर केवल मांस मज्जा का ढांचा नहीं बल्कि एक दिव्य साधना है. जिसे ईश्वर प्राप्ति के परम लक्ष्य के लिए उपयोग करना चाहिए अन्यथा यह भटक जाता है. वहीं सत्संग में संतों के ज्ञान की वर्षा में सत्संग प्रेमी गदगद हो रहे थे. मौके पर गौतम बाबा, लक्ष्मी बाबा, तपेश्वर बाबा, सत्संग प्रेमी छोटेलाल पासवान, अर्जुन साह, विनोद साह, कैलाश साह, दिनेश साह, कमलेश्वरी साह समेत दर्जनों लोग मौजूद थे.

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