शहीद किशोर के पिता ने खुद पैसे खर्च कर बनाया स्मारक, कई घरों में अब तक नहीं पहुंची बिजली

रणवीर/कुंदन/पल्लटू, खगड़िया : देश के लिये मर मिटने वाले शहीद के गांवों में शहादत के वक्त की गयी घोषणाएं बाद में बाबूलोग भूल जाते हैं. खगड़िया में देश की सरहद की रक्षा करते करते जान की बाजी लगाने वाले लाल की कमी नहीं है. जिले के विभिन्न भागों से कई युवा देश के लिये कुर्बानी […]

रणवीर/कुंदन/पल्लटू, खगड़िया : देश के लिये मर मिटने वाले शहीद के गांवों में शहादत के वक्त की गयी घोषणाएं बाद में बाबूलोग भूल जाते हैं. खगड़िया में देश की सरहद की रक्षा करते करते जान की बाजी लगाने वाले लाल की कमी नहीं है. जिले के विभिन्न भागों से कई युवा देश के लिये कुर्बानी दे चुके हैं लेकिन फिर भी सरकार व प्रशासनिक उपेक्षा का दंश आज भी कई शहीदों का गांव झेल रहा है.

इसे शर्मनाक ही कहा जायेगा कि देश की रक्षा की खातिर जान की बाजी लगाने वाले शहीदों के गांव में एक अदद स्मारक तक नहीं है. शहीदों का गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है. इनके अंतिम संस्कार के समय स्थानीय जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री तक से सुविधाएं देने की बात की जाती है लेकिन बाद में भूल जाते हैं.
आज भी परबत्ता के झंझरा, चौथम के ब्रह्मा, और परबत्ता प्रखंड अंतर्गत माधवपुर पंचायत के मुरादपुर निवासी जांबाज शहीद अरविंद झा के गांव के लोग बिजली, पानी जैसे जरूरी मूलभूत सुविधाओं के लिए टकटकी लगाये बैठे हैं.
परबत्ता के झंझरा, चौथम के ब्रह्मा, और परबत्ता प्रखंड अंतर्गत माधवपुर पंचायत के मुरादपुर निवासी जांबाज शहीद अरविंद झा सहित तीन जवानों की शहादत के वक्त अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा इनकी याद में गांव को एक अलग पहचान देने की बात कही गयी थी, लेकिन मुआवजा एवं अनुकंपा नौकरी देकर प्रशासन अपने कर्तव्य से इति श्री कर लिया. हालांकि प्रशासन के तमाम वायदे के बाद भी शहीद के नाम पर एक स्तंभ भी किसी शहीद के गांव में प्रशासन के द्वारा नहीं बनाया गया.
जिससे थक-हारकर चौथम के ब्रह्मा निवासी नागेश्वर यादव ने खुद से अपने शहीद पुत्र किशोर कुमार मुन्ना का स्मारक बनवाया. वहीं परबत्ता के झंझरा और परबत्ता प्रखंड अंतर्गत माधवपुर पंचायत के मुरादपुर निवासी जांबाज शहीद अरविंद झा के गांव में तो प्रशासन द्वारा कुछ यादगार निर्माण तो दूर इनके गांव के लोग आज भी गुमनाम रहने पर मजबूर हैं.
शहीद किशोर कुमार मुन्ना के पिता ब्रह्मा निवासी नागेश्वर यादव ने स्मारक बनाये जाने के लिए एक वर्ष का इंतजार करने के बाद निराश होकर अपने बेटे की याद में स्वयं के खर्च कर स्मारक बनवाकर अपने शहीद बेटे का प्रतिमा स्थापित किया.
जिसके बाद क्षेत्र के लोग इस गांव को शहीद के गांव के रूप में जानते हैं. शहीदों की गांव की उपेक्षा देख क्षेत्र के अनेक लोगों का मानना है कि, शहीद के गांवों में जिला प्रशासन विकास के साथ कुछ ऐसा कर दिखाना चाहिए, जो लोगों के लिये प्रेरणास्त्रोत बन जाये.
जिससे क्षेत्रवासियों में देश ही रक्षा करने की ललक बढ़े. इधर, जिले के परबत्ता प्रखंड के झंझरा निवासी तनुकलाल तिवारी के शहीद पुत्र दिवाकर का 18 जुलाई 2019 को तीसरा शहादत दिवस होगा. शहीद दिवाकर की माता सुनीता देवी और पिता तनुकलाल तिवारी ने कहा कि मेरे इकलौते पुत्र ने सरहद पर देश सेवा करते हुए प्राण गंवाए थे. उन्होंने शहीद दिवाकर के नाम से गांव में स्मारक बनाये जाने की मांग की.
शहीद के अंतिम संस्कार के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास के कई दावे किये थे. तब ग्रामीणों में आस बंधी थी, कि हमें जल्द से जल्द मूलभूत सुविधा मिलेगी.सालों बीतने के बाद भी झंझरा और चौथम के लगभग दर्जनों परिवार गरीबी के कारण आज भी लालटेन युग में जी रहे है.
बावजूद अभी तक बिजली के तार नहीं लग पाये है. जबकि यह क्षेत्र जिला के मुख्य सीमा से लगा हुआ है एवं नदी से घिरा होने के कारण वर्ष भर के जिले से दूसरे जिले के बीच नदियों का आवाजाही बना रहता है.इससे क्षेत्र के लोग दहशत में रात बिताने के लिए मजबूर हैं.वहीं बिजली के बिना स्कूली बच्चों की रात की पढाई भी बाधित हो रही है.बावजूद अब तक आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है.
आर्थिक तंगी से जूझ रहा शहीद का परिवार
सीआरपीएफ कोबरा बटालियन में तैनात परबत्ता के झंझरा निवासी शहीद दिवाकर कुमार पिता तनुकलाल तिवारी ,माता सुनिता देवी खगड़िया जिला के पसराहा थाना क्षेत्र के झंझरा के लाल थे.दिनांक 18-07-2016 को औरंगाबाद बिहार में नक्सली द्वारा लैंड माइन विस्फोट में शहीद हो गये थे.
दिवाकर कुमार शहीद होने से कुछ ही दिन पहले छुट्टी बिताकर घर से वापस ड्यूटी पर लौटे थे.वहीं शहीद होने से 15 दिन पहले शादी हुई थी.शहीद दिवाकर कुमार अपने माता पिता के एकलौते पुत्र थे.जबकि एक बहन भी है जो शादी करने लायक है.
शहीद दिवाकर कुमार के पत्नी को सरकार द्वारा सहायता राशि एवं पेंशन राशि दी जा रही है.लेकिन शहीद के पत्नी अपने ससुर और सास से अलग होकर कुछ ही दिन बाद ही दूसरी शादी कर अलग दुनिया बसा ली है.जिससे शहीद के माता-पिता एक बेटी के साथ रह रहे है.दिवाकर कुमार की बहन शादी के लायक है.लेकिन माता-पिता के आर्थिक तंगी के कारण शादी नहीं कर पाये है.
पान बेचकर गुजारा कर रहे शहीद के पिता
शहीद दिवाकर के पिता तनुकलाल तिवारी वर्तमान में अभी पान बेचकर अपना गुजर बसर कर रहे हैं. शहीद के माता-पिता ने सरकार से मांग है कि गांव में शहीद दिवाकर के नाम से स्मारक बने।शहीद दिवाकर की पत्नी जो दूसरी शादी कर चुकी है, उसका पेंशन बंद कर माता पिता के खाते में पेंशन राशि का भुगतान किया जाए. साथ ही शहीद के माता-पिता को रहने के लिये पक्का मकान का निर्माण कराया जाय. गांव में बिहार सरकार का जमीन उपलब्ध है उसका पैमाइश कर उसपर शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाए.
अरविंद की शहादत पर गांव वालों को है गर्व
परबत्ता प्रखंड अंतर्गत माधवपुर पंचायत के मुरादपुर निवासी जांबाज शहीद अरविंद झा की शहादत पर आज भी क्षेत्र के लोगों को गर्व है. शहीद जवान का जन्म 2 /5/1975 को परबत्ता प्रखण्ड अंतर्गत मुरादपुर गांव में हुआ था. स्व रामेश्वर झा एवं माता स्व भगवती देवी के चौथे वीर सपूत का अरविंद कुमार झा की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के इंदिरा माध्यमिक विद्यालय एवं श्री कृष्ण उच्च विद्यालय नयागांव में हुआ था.दानापुर में 1991 ई में थल सेना में चयन के पश्चात . 24 RR रेजिमेंट में शामिल होकर अपने देश की हिफाजत के लिए तैनात थे.
31 दिसम्बर 2001 को आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान देश के लिए शहीद हो गए थे. तब की सांसद रेणु कुमारी के द्वारा शहीद के नाम पर द्वार एवं स्मारक बनाने की घोषणा की गयी, वर्षों के इंतजार के बाद भी घोषणा जब नहीं पूरा हुआ तो शहीद के पिता ने अपने जीवन काल के अंतिम समय में अपने खर्चें से इस स्मारक का निर्माण कराया.
तब से लेकर आज तक इनके शहादत दिवस के मौके पर सभी ग्रामीणों की मौजूदगी में याद कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. पहली बार इस साल कारगिल दिवस पर सामाजिक कार्यकर्ता लाल रतन कुमार के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने जाबांज शहीद जवान अरविंद झा के स्मारक पर माल्यार्पण कर वीर सपूत को याद किया था.

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