पहले 168 और अब 119 ऋणी पर मुकदमा दर्ज
फर्जी एलपीसी के आधार पर ऋण देने व लेने पर हुई कार्रवाई
सैकड़ों एलपीसी जांच के घेरे में, फर्जी होने की आशंका
खगड़िया: केसीसी ऋण फर्जीवाड़े मामले में आखिरकार कार्रवाई हो ही गयी. बैंक सूत्र के मुताबिक एसबीआइ जलकौड़ा शाखा के तत्कालीन मैनेजर मनोज कुमार को बैंक के उच्च प्रबंधन ने सस्पेंड कर दिया. बीते कई माह पूर्व ही जांच में इस बात का खुलासा हुआ था कि जलकौड़ा के तत्कालीन मैनेजर ने 168 लोगों को फर्जी एलपीसी व लगान रसीद के आधार पर न सिर्फ ऋण स्वीकृत किया बल्कि दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी जारी कर दी. ऋण स्वीकृति के पूर्व मैनेजर ने इन लोगों के द्वारा दिये गये कागजातों की जांच नहीं कराई थी.
खगड़िया व अलौली सीओ के जांच प्रतिवेदन के आधार पर फर्जी जमीन के कागजात के आधार पर केसीसी ऋण लेने वालों के विरुद्ध बैंक प्रबंधन ने प्राथमिकी तो दर्ज करायी थी. लेकिन ऋण स्वीकृत करने वाले मैनेजर पर कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल उठने लगे थे. बगैर एलपीसी के जांच किये/कराए ही इतनी बड़ी संख्या में केसीसी ऋण जारी किये जाने के कारण मैनेजर की भूमिका पर भी प्रश्न उठ रहे थे. इधर सूत्रों ने बताया है कि आखिरकार बैंक प्रबंधन को इन्हें(मनोज कुमार) सस्पेंड करना ही पड़ा.
सूत्र बताते हैं कि अपने करीब डेढ़ साल के कार्यकाल में उक्त मैनेजर ने करीब 6 सौ केसीसी ऋण स्वीकृत किये थे. जबकि अबतक जांच महज 180 से 200 एलपीसी की ही कराई गई है. जिसमें 168 एलपीसी फर्जी पाए गए हैं. सूत्र का दावा है कि अगर शेष बचे एलपीसी की भी जांच हो तो अब भी कई एलपीसी फर्जी निकलेंगे.
जांच के बाद फिर 119 पर प्राथमिकी दर्ज
इधर जांच के बाद एक बार फिर 119 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. ये सभी लोग सदर प्रखण्ड के अलग-अगल गांवों के रहने वाले हैं. इनपर आरोप है कि इन सभी ने फर्जी एलपीसी देकर जिले के लीड बैंक शाखा शोभनी से केसीसी ऋण लिये थे.
तीन गांव समेत ऋणी गायब
केसीसी ऋण वितरण में गड़बड़ी का आलम यह था कि जमीन के कागजात ही नहीं, बल्कि ऋणी व उनके गांव भी जांच में फर्जी पाए गए. बताया जाता है कि अलौली अंचल के छातापुर एवं चंदनपुर व गांव के करीब डेढ़ दर्जन लोगों को करीब दो वर्ष पूर्व एसबीआइ शाखा जलकौड़ा के द्वारा केसीसी ऋण दिये गये थे. लेकिन जब ऋण की राशि जमा करने के लिए इनकी खोज की गयी तो न ऋणी मिले और न इनके गांव. सूत्र की माने तो पहले बैंक ने अपने स्तर से इन तीनों गांव की खोज की. खोज में नाकाम रहने के बाद बैंक ने अलौली सीओ से मदद मांगी. अंचल स्तर से भी काफी खोजबीन करायी गयी.
लेकिन इन तीनों गांवों का अता-पता नहीं चल पाया. जिसके बाद अलौली सीओ राजीव रंजन श्री वास्तव ने जलकौड़ा शाखा प्रबंधक को यह रिपोर्ट भेजी है कि जिन तीन गांव की उन्हें तलाश है, वे अलौली प्रखण्ड में नहीं है. सूत्र बताते है कि इस प्रकार की गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक के उच्च अधिकारी ने फर्जी व नियमों का ताक पर ऋण स्वीकृत करने वाले तत्कालीन मैनेजर को निलंबित कर दिया है. बताया जाता है कि इनके विरुद्ध प्रोसिडिंग आरंभ की जाएगी.
