खगड़िया : जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं. कहीं कोई हड़बड़ाने की बात नहीं है. अफवाह पर ध्यान ना दें. बाढ़ व राहत पर प्रशासन की पैनी नजर है. जिला प्रशासन के अधिकारियों के ऐसे ही कई डायलॉग सुनते सुनते कान पक गये हैं. लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ठीक नहीं है. इन सारे दावों […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
खगड़िया : जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं. कहीं कोई हड़बड़ाने की बात नहीं है. अफवाह पर ध्यान ना दें. बाढ़ व राहत पर प्रशासन की पैनी नजर है. जिला प्रशासन के अधिकारियों के ऐसे ही कई डायलॉग सुनते सुनते कान पक गये हैं. लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ठीक नहीं है. इन सारे दावों के बीच अगर मंगलवार को खगड़िया में जल प्रलय आता तो इसके लिए कोई और नहीं बल्कि सिर्फ बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल के लापरवाह अभियंता जिम्मेवार होते. क्योंकि सबको मालूम था कि तेतारावाद/चंदपुरा का तटबंध कमजोर है तथा यहां पानी का अधिक दबाव रहता है. हर साल यहां स्थिति नाजुक बनी रहती है.
इतना ही नहीं हर बार यहां तटबंध को मजबूत करने का आदेश भी दिया जाता रहा है. इस वर्ष भी शुरू से ही तटबंध को दुरुस्त करने का आदेश दिया गया था.
आदेश की अनदेखी से खतरे की आहट : मंगलवार को तेताराबाद-चंद्रपुरा के बीच बुढी गंडक तटबंध का जो नजारा दिखा वो यह बताने को काफी था कि आमलोगों की सुरक्षा को लेकर जारी आदेश का अधिकारी स्तर पर किस कदर अनदेखी किया गया है. वह भी डीएम के आदेश का जब यह हश्र होता है तो फिर दूसरे की बात कौन सुनता है? जिसके बाद हुआ वही हुआ जिसका डर था. मंगलवार को 80 प्रतिशत से अधिक तटबंध का भाग पानी में समा गया. शुक्र यह रही कि नदी का जलस्तर काफी कम हुआ है.
नहीं तो खगड़िया में जलप्रलय आने से रोकना मुश्किल होता. सभी कुछ तबाह हो जाता. िकतने जान माल का नुकसान होता अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता. बांध का निरीक्षण करने पहुंचे अलौली विधायक चंदन कुमार ने कहा कि समय पर बांध मरम्मत नहीं होने के कारण बाढ़ का खतरा उत्पन्न हुआ है. विधायक ने लापरवाह अभियंताओं पर कार्रवाई की मांग करते हुए हर हाल में बांध को दुरुस्त रखने की मांग की है.
पहले भी आ चुका है जलप्रलय : 1987,2000,2002 एवं 2007 की तरह आज शहर की सड़कों पर नावें चल रही होती,लोगों के आशियाने उजड़ते, किसानों के फसलें बर्वाद होती, लोग पलायन करने को मजबूर होते और बच्चों को भूखे रात गुजारनी पड़ती. यहां यह जानना भी जरूरी है कि उक्त चारों वर्ष जब खगड़िया में बाढ़ आई थी तो लोगो को संभलने का मौका भी मिला था दूसरे जिले में तटबंध टूटे थे इसलिए यहां पानी 24 घंटे बाद आई थी. लेकिन जब चंदपूरा में तटबंध टूटने पर दूसरों को संभालना तो दूर लोगो को खुद भी संभलने का मौका नहीं मिल पाता. क्योंकि चंद समय में ही नदी का पानी पूरे क्षेत्र में फैल जाता. पानी का लेवल कम रहने एवं लोगों की सक्रियता के कारण ही शायद तटबंध को पूरी तरह से टूटने से बचा लिया.
डीएम के आदेश के बाद भी लापरवाह बने रहे अभियंता
बीते 23 अगस्त को डीएम जय सिंह इसी जगह तटबंध का निरीक्षण करने आए थे. संभावित खतरे को भांपते हुए निरीक्षण के दौरान ही डीएम ने विभागीय कार्यपालक अभियंता एवं सहायक अभियंता को क्षतिग्रस्त स्थल के आस-पास तटबंध का मरम्मत कराने का निर्देश दिया था. लेकिन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अभियंता लापरवाह बने रहे. डीएम के निर्देश का भी इन अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा. यह बता दें कि उक्त तटबंध के निरीक्षण के दौरान डीएम साथ में ये दोनों अभियंता भी मौजूद थे.
बीते 23 अगस्त को डीएम जय सिंह इसी जगह तटबंध का निरीक्षण करने आए थे. संभावित खतरे को भांपते हुए निरीक्षण के दौरान ही डीएम ने विभागीय कार्यपालक अभियंता एवं सहायक अभियंता को क्षतिग्रस्त स्थल के आस-पास तटबंध का मरम्मत कराने का निर्देश दिया था. लेकिन बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अभियंता लापरवाह बने रहे. डीएम के निर्देश का भी इन अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा. यह बता दें कि उक्त तटबंध के निरीक्षण के दौरान डीएम साथ में ये दोनों अभियंता भी मौजूद थे.
अब खुली नींद, शुरू हुआ बांध मरम्मत का काम
मंगलवार को त्राहिमाम मचने के बाद अधिकारियों की नींद खुली और कटाव स्थल पर तटबंध को बचाने का काम शुरू हुआ. कटाव स्थल पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है. मिट्टी को बोरी में डालकर गड्ढे को भरा जा रहा है. कई मजदूर इस कार्य में दिन-रात लगे हुए है. जेसीबी ट्रैक्टर से मिट्टी लाए जा रहे है. लोग बस यही कह रहें है कि अगर यहीं काम समय पर करा लिये जाते तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती. लेकिन क्या किया जाय. अधिकारी अपनी आदत से मजबूर हैं.
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार ने बताया कि फिलहाल तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है. मंगलवार से बांध मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है. किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है जिला प्रशासन की इस तटबंध पर पैनी नजर है. जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी बांध मरम्मत कार्य में लापरवाही के सवाल पर कार्यपालक अभियंता ने कहा कि बाढ़ के दौरान मरम्मत कार्य करना संभव नहीं होता. बाढ़ के बाद यह काम करने की योजना थी.
इसे प्रस्ताव में भी लिया गया है. लेकिन इसी बीच मंगलवार को अचानक बांध धंस गया. उन्होंने कहा कि बाढ़ अवधि में तटबंध की निगरानी की जाती है. आवश्यक होने पर निरोधात्मक कार्य किये जाते हैं. कार्यपालक अभियंता श्री कुमार की बातों से यह स्पष्ट हो गया कि डीएम के आदेश के बाद भी अभियंता बाढ़ समाप्त होने का इंतजार करते रहे. ऐसे में सवाल उठता है कि मंगलवार को अगर अनहोनी होती तो इसके लिये कौन जिम्मेवार होता?