एसबीआइ ने भूमिहीन को एलपीसी के आधार पर दिया ऋण

खगड़िया : एसबीआइ की जलकौड़ा शाखा में ऋण वितरण में हुए फर्जीबाड़ा में एक बड़ा खुलासा हुआ. इसके बाद बैंक की भूमिका पर सवाल तो उठ ही गये हैं. इसके साथ ही पीड़ित फरियादी के इस बात पर भी बल मिलने लगा कि उनके नाम से जारी हुये ऋण में कुछ खेल तो जानकर हुआ […]

खगड़िया : एसबीआइ की जलकौड़ा शाखा में ऋण वितरण में हुए फर्जीबाड़ा में एक बड़ा खुलासा हुआ. इसके बाद बैंक की भूमिका पर सवाल तो उठ ही गये हैं. इसके साथ ही पीड़ित फरियादी के इस बात पर भी बल मिलने लगा कि उनके नाम से जारी हुये ऋण में कुछ खेल तो जानकर हुआ है. इस फर्जीवाड़े का शिकार हुए रमुनियां निवासी रामचरित्र तांती यह डंके की चोट पर कह रहे हैं उन्हें बैंक से कोई ऋण नहीं मिला था. न वो बैंक ऋण के लिए आवेदन जमा कराने गये थे.

और न ही उनके नाम से जारी हुए ऋण की राशि उठाने बैंक गये थे. इतना ही इन्होंने अपने आप को भूमिहीन व मजदूर बताया है, तो फिर इनके नाम पर केसीसी ऋण कैसे जारी हुआ. बैंक शाखा प्रबंधक का भी कहना है कि उन्होंने तो ऋण की स्वीकृति दी नहीं, लेकिन पूर्व के जिन प्रबंधक ने रामचरित्र को ऋण दिया था, उन्होंने उनसे (ऋण) सभी कागजात लिये थे. दोनों के जवाब के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि जब उक्त व्यक्ति ने कोई कागजात ही नहीं दिये तो फिर बैंक ने किसे, कौन से कागजात के आधार पर ऋण की स्वीकृति दी व राशि जारी की. सवाल यह भी कि ऋण की राशि किसे मिली.

एलपीसी खोलेगा राज
एसबीआइ की जलकौड़ा शाखा पर शिकायतकर्ता रामचरित्र तांती ने सीधे फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है. उन्होंने बैंक पर ऋण की राशि नहीं दिये जाने के बावजूद राशि जमा करने के लिए नोटिस थमा दिये जाने की बातें शिकायत पत्र में कही है. बैंक द्वारा जारी नोटिस से साफ हो गया है कि उक्त व्यक्ति को केसीसी ऋण दिया गया था. शाखा प्रबंधक द्वारा यह बताया जा रहा है कि बैंक में मौजूद फाईल में उक्त व्यक्ति का एलपीसी यानी लैंड पोजिसन सर्टिफिकेट संलग्न है. अब सवाल यह उठता है कि जब ऋण लेने वाले व्यक्ति भूमिहीन है, तो उनके नाम से एलपीसी कैसे जारी हुआ. जब ये भूमि में मजदूरी करते हैं, तो बैंक ने इन्हें खेती करने के लिए ऋण कैसे जारी कर दिया है. उल्लेखनीय है कि एलपीसी किसान नहीं बल्कि अंचलअधिकारी बनाते हैं. अद्यतन लगान रशीद, राजस्व कर्मचारी व सीआइ की रिपोर्ट के आधार पर सीओ किसी भी व्यक्ति को एलपीसी जारी करते हैं, मतलब जो प्रक्रिया है उससे स्पष्ट है कि किसी भी भूमिहीन व्यक्ति के लिए एलपीसी बन ही नहीं सकता है, क्योंकि उस एलपीसी पर जमीन का खाता, खेसरा, रकवा, जमाबंदी नंबर तक अंकित रहता है. ऐसे में जब उस व्यक्ति के पास जमीन ही नहीं था, तो कैसे एलपीसी जारी हुआ और बैंक ने किस एलपीसी के आधार पर उन्हें खेती करने के लिए केसीसी ऋण जारी किया.
क्यों नहीं हुई एलपीसी की जांच
कुछ वर्षों के दौरान जिले में फर्जी एलपीसी जारी होने का खेल चलता आ रहा है. तत्कालीन एसपी मिट्टी प्रसाद के निर्देश पर फर्जी एलपीसी बनाने व इसके आधार पर ऋण देने वाले बैंकों के कर्मियों पर कार्रवाई भी हुई थी. इसके बाद सभी बैंकों यह स्पष्ट आदेश दिया गया था कि एलपीसी की जांच के बाद ही केसीसी ऋण की स्वीकृति दी जाय. यानी साफ है कि बैंक को एलपीसी की जांच अंचल कार्यालय से कराने के बाद ही उस व्यक्ति को केसीसी ऋण की स्वीकृति प्रदान करना था. अब जांच का विषय है कि बैंक ने उस एलपीसी का सत्यापन अंचल कार्यालय से कराया था या नहीं जानकार बतातें हैं कि बैंक स्तर से यही पर लापरवाही बरती गयी थी. अगर बैंक प्रबंधक ने एलपीसी की जांच करायी होती, तो ऋण की राशि जारी होना तो दूर इन्हें केसीसी की स्वीकृति तक नहीं मिलती. सूत्र इस मामले में बिचौलिये की सक्रिय भूमिका की बातें कह रहे हैं. जबकि बैंक प्रबंधक इससे साफ इनकार कर रहे हैं.
अब तक शिकायकर्ता ने लिखित शिकायत नहीं की है. यह ऋण उनके पूर्व के शाखा प्रबंधक द्वारा जारी किया गया है. फाइल के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि ऋण के सभी मापदंड को पूरा किया गया है. एलपीसी भी शाखा में उपलब्ध है.
सौरभ कुमार सुमन, शाखा प्रबंधक
फर्जीवाड़े से जुड़े मामले को एसबीआइ के वरीय पदाधिकारी के पास स्थानांतरित कर दिया गया है. यह मामला एसबीआइ शाखा का था इसलिए बैंक के जिला समन्वयक व बैंक के वरीय पदाधिकारी के पास भेज दिया गया है तथा उन्हें ही निर्धारित सुनवाई के दिन रिपोर्ट के साथ अनुमंडल लोक शिकायत निवारण के पास उपस्थित रहने को कहा गया है.
एसके राय, एलडीएम
जांच रिपोर्ट अप्राप्त है. रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है, तो निश्चित ही दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी, चाहे दोषी कोई भी हो, बख्से नहीं जायेंगे.
संजीव कुमार चौधरी, सुनवाई पदाधिकारी

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