खगड़िया : परबत्ता के अलावा और भी कई प्रखंडों में सैकड़ों फर्जी शिक्षक अब भी कार्यरत होकर वेतन उठा रहे हैं. निगरानी जांच की रफ्तार व फोल्डर नहीं सौंपे जाने के कारण जांच कर कार्रवाई कब होगी यह किसी को मालूम नहीं है. लिहाजा, सैकड़ों फर्जी गुरुजी अब भी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं और ऐसे गुरुजी पर अब तक कार्रवाई नहीं हो पायी है.
परबत्ता प्रखंड को अपवाद मान लें तो अलौली सहित विभिन्न प्रखंडों के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत इन फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं होने के पीछे नियोजन इकाई सहित अधिकारियों की उदासीनता और माल की महिमा बड़ा कारण माना जा रहा है. तभी तो छह महीना पहले परबत्ता प्रखंड के चार शिक्षकों के फर्जी होने के खुलासा बाद डीइओ द्वारा प्राथमिकी के आदेश के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं हो पायी है. यह हाल तब है जब डीइओ द्वारा इन फर्जी शिक्षकों पर प्राथमिकी के लिये बीइओ को रिमांइडर तक दिया गया है.
अमान्य डिग्रीधारी शिक्षक पर भी कार्रवाई नहीं. सरकारी फाइलों में कई डिग्रियों की मान्यता नहीं दी गयी है, लेकिन खगड़िया में इसी अवैध डिग्री के सहारे दो दर्जन से अधिक शिक्षक मजे से नौकरी कर रहे हैं. कई बार शिकायत हुई, कार्रवाई का आदेश हुआ लेकिन कई तरह की महिमा के सहारे कार्रवाई अधर में है. आरोप है कि जिन शिक्षकों को बरखास्त कर प्राथमिकी दर्ज करवायी जानी चाहिए उसे प्रामोशन दे दिया गया है, जबकि अधिकारियों को इनकी डिग्री सहित अन्य गड़बड़ी के बारे में सब कुछ मालूम था. ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर अंगुली उठना लाजिमी है.
अलौली में 500 से अधिक फर्जी शिक्षक
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार शिक्षक नियोजन में सबसे अधिक फर्जीवाड़ा अलौली प्रखंड में हुआ है. कहा जाता है कि यहां अभी भी 500 से अधिक फर्जी शिक्षक कार्यरत हैं. हालांकि कोई भी प्रखंड या पंचायत शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा से अछूता नहीं है. जिसकी जांच हुई वह धराया और जो परदे के पीछे है उसके बाहर आने का इंतजार है. कई मामलों में शिकायत पत्र फाइलों में भी दफन हो गया है. वह तो शुक्र है कि परबत्ता बीडीओ फर्जी शिक्षकों को बख्शने के मूड में नहीं हैं. लिहाजा, 27 शिक्षकों को हाल ही में बरखास्त किया गया है. जिसके बाद फर्जी शिक्षकों में कार्रवाई के लेकर हड़कंप है.
