– बच्चों की गहन चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल पीकू वार्ड के अभाव में गंभीर रूप से बीमार बच्चों को निजी चिकित्सक के यहां कराया जाता है महंगे दामों पर इलाज कटिहार सदर अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए बनाए गये पीकू वार्ड की शुरुआत बड़े ही उत्साह और उम्मीदों के साथ की गई थी. उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अब जिले के गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर और आधुनिक इलाज की सुविधा यहीं उपलब्ध हो सकेगी. स्वास्थ्य विभाग व अस्पताल प्रशासन ने भी इसे बच्चों के स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बताया था लेकिन समय बीतने के साथ पीकू वार्ड की वास्तविक स्थिति सामने आ गयी है. अब इसे अस्पताल प्रशासन ने एनआरसी (न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर) भवन में तब्दील कर दिया. अब यहां कुपोषण से ग्रसित बच्चों का इलाज व देखभाल की जा रही है. एनआरसी में बच्चों को पोषण आहार, दवाएं और देखरेख तो मिल रही है जबकि, पीकू वार्ड खुला तो जरूर लेकिन बच्चों को आज तक सुविधाएं और संसाधन नहीं मिल सकीं. आवश्यक चिकित्सकीय उपकरण, प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और निरंतर निगरानी जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पायीं. नतीजतन, गंभीर स्थिति में आने वाले बच्चों को या तो अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था या सामान्य वार्ड में ही इलाज होती थी. क्या होता है पीकू वार्ड पीकू यानी पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट बच्चों के लिए बनाया गया विशेष गहन चिकित्सा कक्ष होता है. आमतौर पर नवजात शिशुओं को छोड़कर एक माह से लेकर 12 या 14 वर्ष तक के गंभीर रूप से बीमार बच्चों का इलाज किया जाता है. पीकू वार्ड में सांस की गंभीर समस्या, निमोनिया, सेप्सिस, मस्तिष्क संबंधी रोग, गंभीर संक्रमण, दुर्घटना या अन्य जानलेवा बीमारियों से ग्रसित बच्चों को भर्ती किया जाता है. पीकू वार्ड में मिलने वाली सेवाएं पीकू वार्ड में 24 घंटे विशेषज्ञ बाल रोग चिकित्सकों की निगरानी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट, मॉनिटरिंग मशीन, इमरजेंसी दवाएं और संक्रमण नियंत्रण की विशेष व्यवस्था होती है. यहां हर बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है. ताकि समय रहते जरूरी उपचार किया जा सके. यही कारण है कि पीकू वार्ड को बच्चों के लिए जीवनरक्षक यूनिट माना जाता है. पीकू वार्ड बन गया एनआरसी सदर अस्पताल में संसाधनों की कमी और नियमित संचालन के अभाव में पीकू वार्ड अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर सका. हाल के दिनों में स्थिति यह हो गयी कि अस्पताल प्रशासन ने इस वार्ड को एनआरसी (न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर) भवन में तब्दील कर दिया. अब यहां कुपोषण से ग्रसित बच्चों का इलाज व देखभाल की जा रही है. एनआरसी में बच्चों को पोषण आहार, दवाएं और देखरेख तो मिल रही है. लेकिन गंभीर बीमारियों के लिए जरूरी गहन चिकित्सा सुविधाएं अब भी नदारद हैं. जिला अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए समुचित इलाज की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें निजी अस्पतालों या बाहर के शहरों का रुख करना पड़ता है. जिससे आर्थिक बोझ बढ़ जाता है. सवालों के घेरे में सदर अस्पताल स्वास्थ्य व्यवस्था पीकू वार्ड को सही तरीके से संसाधन और स्टाफ उपलब्ध कराया जाय, तो जिले के सैकड़ों बच्चों की बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन वर्तमान स्थिति में पीकू वार्ड का उद्देश्य अधूरा ही रह गया है. अब देखना यह है कि प्रशासन इस ओर ध्यान देता है या यह महत्वपूर्ण वार्ड केवल नाम तक ही सीमित रह जायेगा. कुल मिलाकर, जिस पीकू वार्ड से बच्चों के बेहतर इलाज की उम्मीद की जा रही थी. वह आज अपने अस्तित्व और उद्देश्य को लेकर सवालों के घेरे में खड़ा है.
सदर अस्पताल में खर्च कर बनाया पीकू वार्ड़ को बना दिया एनआरसी
सदर अस्पताल में खर्च कर बनाया पीकू वार्ड़ को बना दिया एनआरसी
