मनसाही. प्रखंड क्षेत्र के कुरेठा पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय गोविंदपुर में मंगलवार को शिक्षकों ने बाहों में काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया. शिक्षकों ने अपने नियमित शैक्षणिक कार्यों का निर्वहन करते हुए एनपीएस और यूपीएस को बंद कर पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग सरकार से की.
देशभर में काली पट्टी बांधकर हो रहा विरोध
विद्यालय के प्रधान शिक्षक उत्तम कुमार ने बताया कि नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के आह्वान पर देशभर में पुरानी पेंशन से वंचित कर्मचारी, पदाधिकारी और शिक्षक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कर्मचारी और शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग कर रहे हैं.
पुरानी पेंशन कर्मचारियों का अधिकार, कोई खैरात नहीं
प्रधान शिक्षक उत्तम कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है, कोई खैरात नहीं. पूरी जिंदगी देश के भविष्य को संवारने में योगदान देने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानपूर्वक जीवन जीने में पुरानी पेंशन महत्वपूर्ण सहारा है. उन्होंने कहा कि लंबी अवधि तक सरकारी सेवा देने वाले कर्मचारियों को बुढ़ापे में सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए.
एनपीएस और यूपीएस को लेकर भविष्य की सुरक्षा की चिंता
शिक्षकों ने कहा कि राष्ट्रीय पेंशन योजना और यूनिफाइड पेंशन योजना को लेकर कर्मचारियों में भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है.
प्रधान शिक्षक ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधियों को कम अवधि के कार्यकाल के बाद भी पेंशन की सुविधा मिलती है, तो 30 से 35 वर्षों तक सेवा देने वाले शिक्षक और कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से वंचित क्यों रखा जाए.
एक स्वर में बोले शिक्षक, पुरानी पेंशन हमारा हक
विरोध-प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि पुरानी पेंशन कोई भीख नहीं, बल्कि उनका हक है. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली जरूरी है. शिक्षकों ने सरकार से कर्मचारियों की जनभावना को देखते हुए अविलंब पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की.
ये शिक्षक और कर्मी रहे मौजूद
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं में विनोद कुमार रजक, वंदना कुमारी, मंजू कुमारी, सरिका ठाकुर, प्रियम कुमारी, शिक्षा सेवक प्रवीण कुमार ऋषिदेव और गुरचरण ऋषि मौजूद रहे.
