कटिहार संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना को लेकर रविवार को महिलाओं ने पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ जीवित्पुत्रिका व्रत (जिउतिया) रखा. प्रातः काल स्नान-पूजन कर महिलाओं ने व्रत की शुरुआत की और दिनभर निर्जला उपवास रखकर भगवान जीमूतवाहन एवं पितरों की आराधना की. व्रत विशेषकर माताएं अपनी संतान की रक्षा और उन्नति के लिए करती हैं. इस व्रत से संतान पर आने वाले संकट टल जाते हैं और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है. सुबह से ही कई महिलाएं मंदिरों में जुटीं और पूजा-अर्चना के बाद उपवास की शुरुआत की. पूरे दिन महिलाओं ने बिना अन्न-जल ग्रहण किए व्रत कीं. संध्या पूरे विधि विधान पूजा के साथ डलिया भरा गया. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष जिउतिया व्रत का पारण सोमवार की सुबह 6:35 बजे के बाद किया जाएगा, पारण के समय महिलाएं फलाहार और विशेष प्रसाद ग्रहण कर उपवास की समाप्ति करेंगी. आचार्य डॉ. राम कन्हाई शास्त्री ने बताया कि जिउतिया व्रत केवल संतान की दीर्घायु और सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी किया जाता है. दूसरी तरफ डलियां साजने के लिए बाजार में पूजा सामग्री और फल की अच्छी खासी खरीदारी को लेकर सुबह से भीड़ रही.
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