कुरसेला मौसम के बदलते प्रभाव से रोगों का प्रभाव बढ़ गया है.मानव सहित पशु रोगों से संक्रमित हो रहे हैं.सर्दी, जुकाम, दस्त, पेटदर्द आदि रोग से ग्रसित मरीजो की संख्यां बढ़ने की जानकारी मिल रही है.स्वास्थ्य चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्द गर्म के असर शरीर पर पड़ने से लोग रोग से संक्रमित होकर रोगग्रस्त हो रहे हैं.बदलते मौसम से सुरक्षा के लिये एहतियात बरतने की जरुड़त है.ठंड और गर्म के प्रभाव से बचाव करने की जरुरत है.खास कर बच्चों को रोग संक्रमण से बचाव के लिये सावधानी बरतने की आवश्यकता है.लाइफ लाइन हास्पीटल के डा कमर हाशमी ने बताया कि रोग प्रभाव से बचने के लिये इम्यूनिटी बढ़ाने की जरुड़त है.इम्यूनिटी बढ़ने से बदले मौसम का रोग प्रभाव के असर से बचा जा सकता है.डा हाशमी ने कहा कि बदलते मौसम मे बुखार, सर्दी, खांसी, दस्त, पेट में गड़बड़ी की समस्याया बढ़ जाती है.खान पान में सावधानी व शरीर मे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने से रोग खतरा को कम किया जा सकता है. खास कर बच्चों को रोग बचाव के लिये सावधानी बरतने की जरुरत होती है.बदलते मौसम रोग संक्रमण का फैलाव बढ़ जाता है. संक्रमण से बचाव के लिये इम्यूनिटी बढ़ाया जा सकता है. क्षेत्र में बच्चे सबसे अधिक बुखार सर्दी खांसी दस्त आदि रोग से प्रभावित हो रहे हैं. ग्रामीण चिकित्सकों के साथ सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिये मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. प्रतिदिन इस तरह के रोग से संक्रमित मरीज अधिक संख्या में सीएचसी और निजी क्लीनिकों पर उपचार के लिये पहुंच रहे हैं. लोग घटते ठंड के बीच इससे सुरक्षा की अनदेखी कर रहे हैं. नतीजन ठंड के असर शरीर पर होने से लोग सर्दी खांसी जुकाम से ग्रसित होकर बीमार पड़ रहे है जबकि, बदलते मौसम में ठंड का प्रभाव मानव शरीर के लिये घातक समझा जाता है.शरीर पर ठंड के साथ गर्म का असर से कुप्रभाव पड़ने से बीमार होने का स्थिति पैदा कर जाता है. पशुओं में बदलते मौसम के बीच रोग संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. जानकारों का कहना है कि प्राकृतिक रुप से बसंत का यह मधुमास मौसम बेहद खास होता है.जिसकी अनुभुति बेहद खास होती है.
बदले मौसम में सर्दी ज़ुकाम से ग्रसित मरीजों की बढ़ रही है संख्या
बदले मौसम में सर्दी ज़ुकाम से ग्रसित मरीजों की बढ़ रही है संख्या
