जूट को फसल चक्र के शामिल करने से मिट्टी की बनी रहती है उर्वरा शक्ति

जूट को फसल चक्र के शामिल करने से मिट्टी की बनी रहती है उर्वरा शक्ति

कटिहार संयुक्त कृषि भवन के सभागार में बुधवार को उन्नत तकनीक से जूट की खेती व जूट फसल चक्र प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण का शुभारम्भ निदेशक शस्य पूर्णिया, जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक आत्मा मिथिलेश कुमार व आईसीएआर क्रिजाफ बैरकपुर कोलकाता के निदेशक द्वारा संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया गया. आईसीएआर क्रिजाफ बैरकपुर कोलकाता के निदेशक ने जूट उत्पादन करने वाले किसानों को अपने यहां से जूट से सम्बंधित प्रशिक्षण करने के लिए आमंत्रित किया. जूट की खेती से लेकर जूट उत्पादों में जूट बैग, जियो टेक्सटाइल, हथकरघा वस्त्र व जैविक खाद निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया पर प्रकाश डाला. कहा कि जूट के फाइबर से बने उत्पाद बाजार में उच्च मूल्य प्राप्त कर किसानों की आय को दोगुनी करने में सहायक सिद्ध हो सकती है. संयुक्त निदेशक शस्य पूर्णिया प्रमंडल ने जूट की खेती को बढ़ावा देने की बात कही. ऐसा इसलिए कि यहां की मिट्टी जूट की खेती के लिए उपयुक्त है. यहां की मिट्टी में उन्नत किस्म के रेशे प्राप्त होती है. रेशे का बाजार मूल्य अधिक मिलता है. जूट से बने कपड़े, फाइल, जूट बैग व कार्पेट आदि से सम्बंधित किसानों को समूह बनाकर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की बात कही. जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक आत्मा मिथिलेश कुमार ने जूट के किसानों से जूट की खेती करने पर बल देने के साथ बताया कि जूट की खेती में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बहुत कम होता है. जूट को फसल चक्र के शामिल करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है. किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त हो साथ ही किसानों को जूट की उन्नत तकनीक से खेती के लिए आईसीएआर क्रिजाफ बैरकपुर, कोलकाता में खेती की तैयारी, उन्नत बीज चयन, उर्वरक प्रबंधन, फसल कीट प्रबंधन एवं मूल्या संवर्द्धन विषय पर प्रशिक्षण प्राप्त करने की बात कही. मौके पर उपपरियोजना निदेशक आत्मा, जूट अनुसंधान केन्द्र कटिहार के वैज्ञानिक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी आत्मा व सभी प्रखंडों के कुल 120 कृषकों ने भाग लिया.

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By RAJKISHOR K

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