– आरबीएसके के तहत दिव्यांग बच्चों को ठूंसकर लाने का मामला, जिम्मेदारों ने एक-दूसरे पर डाली जिम्मेदारी कटिहार सदर अस्पताल में बुधवार को स्वास्थ्य व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आयी जिसे स्वास्थ्य की लेकर बेहतर व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गये. मरीजों को बेहतर सुविधा देने के दावों के बीच एक ही एंबुलेंस में 7 मरीजों व करीब 10 परिजनों को भेड़ बकरी की तरह ठूंसकर सदर अस्पताल लाया गया. यह तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को साफ दिखा रही थी. जानकारी के अनुसार, सभी मरीज राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत आजमनगर उप स्वास्थ्य केंद्र से जांच और इलाज के लिए लाए गए थे. अधिकतर दिव्यांग बच्चे शामिल थे. जिन्हें विशेष देखभाल की जरूरत होती है. नियमों के मुताबिक एक एंबुलेंस में केवल एक मरीज और अधिकतम दो परिजन ही साथ जा सकते हैं. लेकिन यहां नियमों की खुली अनदेखी की गयी. एंबुलेंस चालक ने बताया कि वह बारसोई अस्पताल से वाहन लेकर आया था और आजमनगर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शकील अहमद के निर्देश पर सभी को एक साथ लेकर सदर अस्पताल पहुंचे. डॉ शकील अहमद ने कहा कि बच्चों की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए लाना जरूरी था. यह निर्णय आरबीएसके के जिला समन्वयक प्रशांत झा और उच्च अधिकारियों के निर्देश पर लिया गया. इस तस्वीर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जिले में पर्याप्त एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को इस तरह जोखिम में क्यों लाया गया. सदर अस्पताल परिसर में भी कई एंबुलेंस मौजूद रहती हैं. लापरवाही मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है. यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है.
लापरवाही, एक एंबुलेंस में 7 मरीज व 10 परिजन, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठा सवाल
लापरवाही, एक एंबुलेंस में 7 मरीज व 10 परिजन, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठा सवाल
