क्षेत्रीयता और भारतीयता से ऊपर उठकर वैश्विक हो चुकी हिन्दी भाषा कटिहार आज हिंदी दिवस है. वही हिंदी, जिसमें हमें सपने आते हैं,जिसे हम साकार करते हैं और तरक्की की नई पटकथा लिखते हैं. लगभग एक हजार वर्ष पुरानी हमारी यह हिंदी अब पूरी तरह से आधुनिक हो चली है. आधुनिक इन अर्थों में कि आज हिंदी में शब्दों की कुल संख्या दो लाख के आसपास है,जबकि तकनीकी शब्दों को भी मिला देने से इसकी संख्या तकरीबन छह लाख तक पहुंच जा रही है. कहने का अर्थ यह है कि अब हिंदी के शब्दों में कुछ भी कहने की पूरी ताकत आ गयी है,यही कारण है हिंदी भाषा क्षेत्रीयता और भारतीयता से ऊपर उठकर आज वैश्विक हो गया है. केबी झा कॉलेज के हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. जितेश कुमार ने बताया कि तमाम ऐसे उदाहरण हैं जिसने यह साबित किया है कि हिंदी विश्वभाषा बनने के काफी निकट है. इधर हाल के वर्षों में हिंदी के प्रति विश्व समुदाय ने जो दीवानगी दिखाई है वह इसकी लोकप्रियता को दिखाता है. हिंदी की खूबसूरती इसी में है कि यह अन्य भाषाओं की तुलना में काफी सरल,सहज और लचीली है. इसे सीखना आसान है, तभी तो वैश्विक स्तर पर 150 से भी अधिक विश्वविद्यालयों में यह पढ़ने- पढ़ाने का माध्यम बन चुकी है. भारत में हिंदी की कुल अठारह बोलियां हैं जो इसकी विविधता को दर्शाता है, भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी का अपना विशेष प्रभाव है, तभी तो हिंदी भारत और भारतीयता की आत्मा और शृंगार है. डॉ जितेश कुमार ने बताया कि हाल के दिनों में हिंदी को लेकर भारत में कुछ विवाद देखने को मिले,लेकिन वह भाषा ही क्या जिसके वैश्विक मंच तक पहुंचने पर अन्य भाषा को जलन न हो,हिंदी हमारी मातृभाषा है, आज यह जनभाषा का दर्जा प्राप्त है, कुछ राजनैतिक प्रभावों के कारण यह राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है लेकिन वह दिन दूर नहीं जब हिंदी विश्वभाषा बनेगी.
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