कटिहार जिले के कुरसेला प्रखंड अंतर्गत दक्षिणी मुरादपुर पंचायत के तीनघरिया नवटोलिया गांव के समीप गंगा नदी का कटाव अब विनाशकारी रूप ले चुका है. नदी का रुख सीधे आबादी की ओर होने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी और भारी दहशत का माहौल है. वर्तमान में गांव से नदी के कटाव की दूरी मात्र डेढ़ सौ (150) मीटर रह गई है, जिससे पूरे गांव के वजूद पर संकट गहरा गया है.
बंबू पायलिंग के बाद जिओ बैग का काम भी पड़ा ठप
कटाव की भयावहता को देखते हुए जल संसाधन विभाग की ओर से पहले बंबू पायलिंग (बांस का घेरा) कराई गई थी, जो नदी की तेज धाराओं के आगे पूरी तरह बेअसर साबित हुई. इसके बाद विभाग ने कटाव रोकने के लिए तट पर 'जिओ बैग' (Geo Bags) डालने का काम शुरू किया था.
काम को 24 घंटे जारी रखने के लिए मौके पर जेनरेटर और रोशनी का इंतजाम भी किया गया था. हालांकि, मंगलवार को कतिपय कारणों से जिओ बैग डालने का काम अचानक बंद रहा और कटाव स्थल पर एक भी कर्मी मौजूद नहीं दिखा. तेज हवाओं के बीच काम बंद होने से तटीय जमीन लगातार नदी में समाती रही, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है.
स्थायी समाधान के लिए बोल्डर पिचिंग और ठोकर की मांग
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि अब तात्कालिक और अस्थायी उपायों से गांव को बचाना संभव नहीं है. उन्होंने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से स्थायी कटाव निरोधक कार्य कराने की मांग की है:
- बोल्डर पिचिंग: नदी के तट पर पक्की बोल्डर पिचिंग कराई जाए.
- ठोकर एवं तटबंध: मजबूत ठोकर और पक्के तटबंध का निर्माण कराया जाए.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो तीनघरिया नवटोलिया के साथ-साथ बसुहार, मजदिया और कमलाकान्ही जैसे आसपास के दर्जनों गांव भी गंगा नदी के पेट में समा जाएंगे. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कटावरोधी कार्य में तेजी लाने की गुहार लगाई है.
