कटिहार जिले के फलका प्रखंड अंतर्गत मोरसंडा गांव में इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल सामने आई है. सावन की सोमवारी पर बरंडी नदी के कमला घाट में स्नान के दौरान गहरे पानी में समा रहे बच्चों को बचाने के लिए मोरसंडा निवासी दाऊद आलम ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी. दाऊद ने अदम्य साहस दिखाते हुए डूब रहे तीन बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि एक अन्य बच्चे को स्थानीय ग्रामीण ने बचाया. हालांकि, इस दर्दनाक हादसे में तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में कोहराम मच गया है.
सोमवारी स्नान के दौरान गहरे पानी में चले गए सात बच्चे
सोमवार को सोमवारी पर्व के अवसर पर मोरसंडा गांव स्थित बरंडी नदी के कमला घाट पर दर्जनों बच्चे स्नान कर रहे थे. स्नान के दौरान अचानक करीब सात बच्चे गहरे पानी के बहाव में चले गए और डूबने लगे. बच्चों को डूबता और हाथ-पैर मारता देख घाट किनारे मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई और लोग चीख-पुकार करते हुए मदद की गुहार लगाने लगे.
जान पर खेलकर दाऊद ने तीन बच्चों को निकाला बाहर
नदी के पास ही अपने खेत में काम कर रहे दाऊद आलम की नजर जैसे ही डूबते बच्चों और शोर मचाते लोगों पर पड़ी, वे बिना एक पल गंवाए नदी की ओर दौड़े.
अपनी जान जोखिम में डालते हुए दाऊद ने तत्काल उफनती नदी में छलांग लगा दी. उन्होंने कड़े संघर्ष और भारी मशक्कत के बाद तीन बच्चों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया. इसी बीच मौके पर मौजूद एक अन्य ग्रामीण ने भी तत्परता दिखाते हुए चौथे बच्चे को सकुशल पानी से बाहर खींच लिया.
बचाए गए बच्चों में प्रियांशु कुमार (14 वर्ष), सुजीत कुमार (15 वर्ष), नीरज कुमार (14 वर्ष) और आशिक कुमार (17 वर्ष) शामिल हैं. चारों बच्चों को फौरन मोरसंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई.
तीन बच्चों की मौत से परिजनों में मचा कोहराम
दाऊद और ग्रामीणों के भरसक प्रयासों के बावजूद तीन बच्चों को नहीं बचाया जा सका और गहरे पानी में डूबने से उनकी मौत हो गई. इस हृदयविदारक हादसे की सूचना मिलते ही पूरे मोरसंडा गांव में मातम छा गया. मृतक बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है.
इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं: दाऊद आलम
अपने इस साहसिक कार्य को लेकर दाऊद आलम ने कहा कि उस संकट की घड़ी में उनके मन में जाति या धर्म का कोई विचार नहीं था. उन्होंने कहा कि उनकी नजर में संकट में फंसे सभी बच्चे सिर्फ इंसान और किसी परिवार के चिराग थे. किसी भी व्यक्ति की जान बचाना और मुसीबत में काम आना ही दुनिया की सबसे बड़ी इंसानियत है.
जनप्रतिनिधियों ने की दाऊद को पुरस्कृत करने की मांग
दाऊद आलम के इस अदम्य साहस और मानवीय जज्बे की पूरे प्रखंड क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है. प्रखंड प्रमुख दीप शिखा सिंह, उप प्रमुख नेहा प्रवीण, मुखिया संघ अध्यक्ष राजेश रंजन, मुखिया अजहरुद्दीन उर्फ राजू नायक, जिला परिषद प्रतिनिधि मनोज मंडल और उप मुखिया सेरूद्दीन ने दाऊद के हौसले की तारीफ की है. सभी जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि दाऊद आलम को इस बहादुरी और इंसानियत की मिसाल पेश करने के लिए उचित पुरस्कार व सम्मान दिया जाए.
