कटिहार 102 एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल को गुरुवार को सात दिन पूरे हो गये. लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आयी है. हड़ताल के कारण गरीब व जरूरतमंद मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है. आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाने में बड़ी मुश्किलें आ रही हैं. स्थिति एसी हो गई है की हड़ताल पर बैठे चालक और ईएमटी कर्मियों के सामने अब परिवार का भरण-पोषण करना भी चुनौती बन गयी है. कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी जायज़ मांगों को लेकर बार-बार सरकार और एजेंसी का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई. कर्मियों की प्रमुख मांगों में आठ घंटे के श्रम अधिनियम के तहत न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये और अतिरिक्त कार्य के लिए अलग भुगतान शामिल है. इसके अलावा वे ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर सेवाओं को सरकारीकृत करने, दुर्घटना बीमा के तहत 20 लाख रुपये मुआवजा देने और बिना शर्त नियुक्ति पत्र एवं वेतन स्लिप उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं. एंबुलेंस कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि नवंबर 2024 माह का वेतन अब तक नहीं दिया गया है. साथ ही कई कर्मचारियों को बिना कारण कार्यमुक्त कर दिया गया. जिन्हें वापस नौकरी पर बहाल करने की मांग उठायी गयी है. कर्मियों का कहना है कि 102 एंबुलेंस का समय पर रख-रखाव व सही ढंग से मेंटेनेंस होना भी जरूरी है. ताकि मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो, हड़ताल से जहां मरीजों की परेशानी बढ़ रही है. कर्मचारियों का गुस्सा भी बढ़ता जा रहा है. साफ कहना है की जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा.
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