कटिहार जिला प्रशासन द्वारा हाल ही में आशा कर्मियों पर सख्त कार्रवाई के बावजूद सदर अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला रविवार का है. जिसमें एक आशाकर्मी पर गर्भवती महिला को बहला-फुसलाकर सदर अस्पताल की बजाय निजी अस्पताल में भर्ती कराने का आरोप लगा है. प्राणपुर की रहने वाली आशा कर्मी करुणा देवी गर्भवती महिला सुनीता सोरेन को लेकर डिलीवरी कराने के लिए सदर अस्पताल पहुंची थी. आरोप है कि उन्होंने महिला की डिलीवरी सदर अस्पताल में कराने के बजाय उसे शहर के जूट मिल के सामने स्थित एक निजी अस्पताल गांधी हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया. वहां गरीब महिला को डिलीवरी के लिए एडमिट भी कर लिया गया. हाल ही में जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने आठ आशा कर्मियों को सेवा से मुक्त कर दिया था. इन पर आरोप था कि वे सदर अस्पताल आने वाले मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में ले जाती थीं और बिचौलिये की भूमिका निभाती थीं. रविवार को जब इस मामले की जानकारी मिली और आशाकर्मी करुणा देवी से पूछताछ की गई तो वह पहले निजी अस्पताल में ही छिप गईं, बाद में सामने आने पर उन्होंने अपनी सफाई देते हुए कहा कि वह पहले गर्भवती महिला सुनीता सोरेन को लेकर सदर अस्पताल पहुंची थीं. उनका कहना था कि वहां मौजूद नर्स ने महिला की स्थिति गंभीर बताते हुए भर्ती लेने से मना कर दिया और कहा कि यहां डिलीवरी संभव नहीं है. इसी कारण वह महिला को बेहतर इलाज के लिए गांधी हॉस्पिटल ले गईं, जहां उसे भर्ती कराया गया. सदर अस्पताल के लेबर रूम में तैनात एएनएम से जानकारी ली गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस नाम की कोई भी गर्भवती महिला डिलीवरी के लिए अस्पताल में नहीं पहुंची थी. कहते हैं जिला स्वास्थ्य विभाग के डीसीएम डीसीएम अश्वनी कुमार मिश्रा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, इसकी जांच की जाएगी, यदि मामले में आशा कर्मी दोषी पाई जाती है तो उन पर विधि संवत कार्रवाई होगी,
आशाकर्मी पर मरीज को निजी अस्पताल ले जाने का आरोप
आशाकर्मी पर मरीज को निजी अस्पताल ले जाने का आरोप
