तटबंध पर मिट्टी की जगह भरा जा रहा बालू
धूल के गुबार से लोगों का सड़क पर चलना
हुआ मुश्किल
आजमनगर : बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सालमारी के अधीनस्थ सालमारी-आजमनगर बायां तटबंध पर डोबेल निर्माण में मिट्टी की जगह खुलेआम बालू भरा जा रहा है. इससे भविष्य में बांध की मजबूती कितनी कारगर रह पायेगी. इसका सहज अंदाजा सालमारी-आजमनगर मुख्य मार्ग पर उड़ रही धूल से लगाया जा सकता है. लोगों का कहना है कि डोबेल निर्माण में मिट्टी का उपयोग किया जाना है. रोलिंग, कॉम्पेक्ट आदि करने होते हैं.
इन तमाम नियमों की अनदेखी करते हुए मिट्टी की जगह धड़ल्ले से बालू संवेदक द्वारा दिया जा रहा है. बावजूद न तो रोलिंग का और ना ही पानी का उपयोग ही किया जा रहा है. सड़क पर चलना इन दिनों कठिन हो रहा है. जंगल झाड़ के ऊपर ही बालू उक्त मिट्टी भरी जा रही है. सवाल ये उठ रहा है कि लोगों के अनुसार अगर निर्माण कार्य में खुलेआम संवेदक द्वारा अनियमितता बरती जा रही तो संबंधित विभाग के एक्जीक्यूटीव इंजीनियर व कनीय अभियंता व सहायक अभियंता क्या कर रहे हैं. क्या उनको हो रही अनियमितता की जानकारी नहीं या फिर जान कर अनजान बने हुए हैं. बहरहाल मामला जो भी रहा हो, लोग जिला प्रशासन से हो रहे डोबेल निर्माण कार्य की जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने की मांग कर रहे हैं. निर्माण कार्य शुरू होने के 15-16 दिन गुजरने को हैं. लेकिन, सूचना पट अब तक निर्माण स्थल पर नहीं लगाया जाना संभावित बड़ी अनियमितता की ओर संकेत देता मालूम पड़ता है. सवाल ये भी उठ रहा कि आखिर सूचना पट क्यों नहीं लगाया जा रहा है. आखिर इसकी क्या वजह हो सकती है. निर्माण स्थल पर कार्य करा रहे लोगों से पूछे जाने पर क्षेत्र के लोगों को स्टीमेट नहीं दिखाया जाता है. लोगों ने कहा कि संवेदक सालमारी स्थित प्रमंडलीय बाढ़ नियंत्रण सालमारी के सरकारी क्वार्टर में अपना डेरा जमाये हुए हैं. लोग उक्त मामले के भी जांच कीमांग जिला पदाधिकारी सहित अनुमंडल बारसोई प्रशासन से करने की मांग कर रहे हैं. बाढ़ नियंत्रण सालमारी कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी में 2.6 करोड़ की लागत से डोबेल निर्माण कार्य कराया जा रहा है.
कहते हैं कार्यपालक अभियंता
इस संदर्भ में बाढ़ नियंत्रण अवर प्रमंडल सालमारी के कार्यपालक अभियंता शशि रंजन पांडेय ने दूरभाष पर बताया कि अनियमितता की जांच की जायेगी. विभागीय सरकारी क्वार्टर खाली रहने के कारण उसमें संवेदक को रहने दे दिया गया है. नियम कायदे की बात पर चुप्पी साध गये.
