कटिहार : मोबाइल क्रांति ने पिछले एक-डेढ़ वर्षों में लोगों के जीवन को काफी प्रभावित किया है. खासकर स्वास्थ्य सेवाओं में मोबाइल का बढ़ते हस्तक्षेप ने चिकित्सक व मरीजों की दूरी बढ़ा दी है. बढ़ते बाजारवाद व प्रतिस्पर्धा के बीच मरीज तथा उनके परिजनों को अतिशीघ्र परिणाम प्रवृत्ति पैदा की है. जाने माने शिशु रोग […]
कटिहार : मोबाइल क्रांति ने पिछले एक-डेढ़ वर्षों में लोगों के जीवन को काफी प्रभावित किया है. खासकर स्वास्थ्य सेवाओं में मोबाइल का बढ़ते हस्तक्षेप ने चिकित्सक व मरीजों की दूरी बढ़ा दी है. बढ़ते बाजारवाद व प्रतिस्पर्धा के बीच मरीज तथा उनके परिजनों को अतिशीघ्र परिणाम प्रवृत्ति पैदा की है. जाने माने शिशु रोग विशेषज्ञ व बच्चा हॉस्पिटल के निदेशक डॉ गाजी शारिक अहमद ने सोमवार को प्रभात खबर से बातचीत करते हुए उक्त बातें कही.
उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक-डेढ़ वर्षों में संचार के क्षेत्र में जबरदस्त क्रांति आयी है. इससे जीवन का हर तबका प्रभावित हुआ है. इससे स्वास्थ्य का क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा.
मोबाइल क्रांति की वजह से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गयी है. जल्दी परिणाम पाने की प्रवृत्ति बढ़ी है. मरीज एवं उनके परिजन चिकित्सक के परामर्श पर अमल करने के बजाय मोबाइल पर ऐसे-ऐसे सवाल पूछने लगे हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य से कोई लेना-देना नहीं होता है. डॉ गाजी ने कहा कि यह सही है कि चिकित्सा के क्षेत्र में नई-नयी तकनीक व उपकरण ने मरीजों के स्वास्थ्य जांच को आसान बना दिया है. लेकिन इस मोबाइल युग में जिस तरह मरीजों व उनके परिजनों ने तुरंत स्वस्थ हो जाने की प्रवृत्ति बढ़ी है. वह चिकित्सा क्षेत्र के लिए उचित नहीं है.
रोग की स्थिति भी उसके स्वस्थ होने की अवधि निर्धारित करती है. चिकित्सक अपने अनुभव व योग्यता से एक माध्यम बनता है. डेढ़-दो साल पहले मरीजों एवं उनके परिजनों ने स्वस्थ होने को लेकर धैर्य दिखता था. लेकिन वह धैर्य समाप्त हो रहा है. मरीजों एवं उनके परिजनों के प्रति जल्दी स्वस्थ होने की व्याकुलता बढ़ गयी है. हालांकि मानवीय आधार पर लोगों की जिज्ञासा उचित है. परंतु जिस चीज को पढ़ने-समझने में दस साल का समय लगता है. तो उसे क्षण भर में कैसे समझा जा सकता है.