शहर के किसी भी पथ में चले जाइये. हर पथ में टेंपो नजर आ जायेगा. शहरों में बेरोक-टोक टेंपो की आवाजाही से कई तरह की समस्या उत्पन्न होती है. शहर में जाम लगने के एक प्रमुख कारणों में टेंपो की अव्यवस्थित आवाजाही भी है.
कटिहार : शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैफिक समस्या का एक मुख्य कारण टेंपो (ऑटो) है. शहर क्षेत्र के किसी भी पथ में चले जाइये. हर पथ में टेंपो नजर आ जायेगा. शहरों में बेरोक-टोक टेंपो की आवाजाही से कई तरह की समस्या उत्पन्न होती है. खास कर शहर में जाम लगने का एक प्रमुख कारणों में टेंपो की अव्यवस्थित आवाजाही भी है.
कमोवेश हर दिन टेंपो की वजह से शहर को जाम से जूझना पड़ता है. हालांकि इसके लिए महज टेंपो चालक दोषी नहीं हैं, बल्कि नगर निगम प्रशासन व जिला प्रशासन दोनों ही जिम्मेदार हैं. राजस्व उगाही के बावजूद शहरी क्षेत्रों में एक भी टेंपो स्टैंड नहीं है. टेंपो स्टैंड नहीं होने की वजह से टेंपो चालक शहर में जहां-तहां अस्थायी रूप से अपना टेंपो खड़ा कर न केवल यात्री को बैठाते हैं, बल्कि घंटों प्रतीक्षा भी करते हैं.
जिला प्रशासन ने अगले वित्तीय वर्ष से शहीद चौक स्थित बस स्टैंड को कटिहार-मनिहारी पथ के उदामारेखा में संचालित करने का फैसला किया है. लेकिन अब तक टेंपो पड़ाव को लेकर इस तरह का कोई प्रस्ताव निगम प्रशासन व जिला प्रशासन के पास नहीं है. जबकि कटिहार जिले में बस से 10 गुणा अधिक टेंपो का परिचालन हर दिन होता है. सिर्फ शहर क्षेत्र में 300 से अधिक ऑटो की आवाजाही हर दिन होती है.
शहरी क्षेत्र में जाम का एक मुख्य कारण टेंपो का अव्यवस्थित परिचालन है. शहर के शहीद चौक, एमजी रोड, न्यू मार्केट रोड, कल्याण चौक, महमूद चौक, मिरचाईबाड़ी चौक, आंबेडकर चौक, कालीबाड़ी रोड सहित ऐसे स्थल हैं, जहां अस्थायी टेंपो खड़ा किये जाने से जाम व ट्रैफिक की समस्या उत्पन्न होती है. कभी-कभी टेंपो चालकों को पुलिस का डंडा भी खाना पड़ता है. आये दिन इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है.
10 हजार से अधिक होती है राजस्व की वसूली : टेंपो चालकों से हर दिन नगर निगम प्रशासन बैरियर शुल्क के नाम पर दस हजार से अधिक की राजस्व वसूली करती है. लेकिन सुविधाओं के नाम पर उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं है. शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में बैरियर सहित विभिन्न शुल्क के नाम पर सरकार को टेंपो परिचालन से राजस्व मिलती है.
इसके बावजूद उनके लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं भी टेंपो स्टैंड नहीं है. न ही किसी तरह की बुनियादी सुविधा उन्हें मिलती है. यहां तक कि कई बार प्रशासन का शिकार भी उन्हें बनना पड़ता है. टेंपो चालक कंचन दास, महावीर मंडल, मो मुस्तफा ने बताया कि टेंपो परिचालन को लेकर हमेशा ही उनके भीतर पुलिस व प्रशासन का खौफ रहता है.पूर्व डीएम के आदेश पर नहीं हुई कार्रवाई:
हालांकि शहरी क्षेत्र में टेंपो पड़ाव को लेकर वर्ष 2010 में तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने जिला ऑटो एसोसिएशन के मांग पर नगर निगम के समीप टेंपो स्टैंड बनाने का आदेश पारित किया था, लेकिन उस पर आज तक कोई अमल नहीं हुआ.
