त्याग व बलिदान का पर्व है बकरीद : मौलाना शब्बीर
फलका : ईद उल अजहा बकरीद की तैयारी पूरी हो गयी है. बकरीद पर्व की फजीलत पर मौलाना शब्बीर अहमद कासमी ने बताया कि हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने एक ख्वाब देखा कि मैं अपने बेटे इस्माइल अलैहिस सलाम को अल्लाह के नाम पर कुर्बानी दे रहा हूं. यही ख्वाब उन्होंने तीन रोज तक देखा. इसलिए उन्होंने अपने बेटे को बुलाकर पूछा, बेटा मैंने आज ख्वाब देखा है कि मैं तुम्हें अल्लाह के नाम पर कुर्बानी दे रहा हूं. फर्माबरदार बेटा बाप के इशारे को फौरन समझ गया और बोला अब्बाजान आपको जिस चीज का हुक्म मिला है, उसे पूरा कीजिए. इसके बाद हजरत इब्राहिम अपने जाने जिगर को लेकर मक्का से मशरिक मीणा की जानिब लेकर रवाना हो गये. शैतान को हजरत इब्राहीम की यह अदा पसंद नहीं आयी और वह एक मेहरबान हमदर्द की शक्ल में इस्माइल की अम्मा के पास पहुंचा.
और पूछा इस्माइल कहां गये. उन्होंने जवाब दिया कि अपने वालिद के साथ जंगल से लकड़ियां लाने गये हैं. शैतान ने कहा तुम गफलत में हो इस्माइल के बाप उसे जबह करने ले गये हैं. यह सुनकर मां ने जवाब दिया कि उनको अल्लाह के हुक्म की तामील करनी चाहिए. शैतान का साजिश कामयाब न हुआ, तो उसने हजरत इब्राहिम को रोकना चाहा. मैदान में उन्होंने कुर्बानी की जगह पहुंचकर अल्लाह के हुक्म की तामील शुरू कर दी. खुदा के नाम पर छुरी उठाई और कुर्बानी का इरादा किया, तो आवाज आयी यानी अल्लाह की रहमत जोश में आये और छूरी को हुक्म दिया. खबरदार इस्माइल का एक बाल भी न कटे और खुदा ने इस्माइल की जगह एक उम्दा दुंबा ( बकरा नस्ल ) कुर्बानी के लिए नाजिल किया. इसी तरीके तमाम मुसलमानों पर फर्ज अदा कर दिया. अल्लाह पाक ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की इस अदा को इतना पसंद किया कि उसे कयामत तक के बाले इंसानियत के लिए एक यादगार बना दिया. हर साल जिल हिज्जा के 10-11-12 उर्दू की तारीख यानी इस वर्ष अगस्त माह के 22-23-24 तारीख को कुर्बानी दी जानी है.
