बाढ़ . 60 घंटे बाद भी शहर के बाढ़पीड़ितों की नहीं ली सुधि
शहर में बाढ़ का पानी सैकड़ों लोगों के घरों में घुसा है. लोग घर बार छोड़कर सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर शरण लिये हुए है. पर, बाढ़ आने के तीसरे दिन भी इन बाढ़पीड़ितों को जिला प्रशासन की ओर से किसी तरह की कोई राहत उपलब्ध नहीं करायी गयी है. इसके कारण बाढ़पीड़ितों में आक्रोश है.
कटिहार : बाढ़पीड़ित भूखे, प्यासे बिलख रहे हैं, लेकिन उनकी सुधि लेने की जरूरत किसी ने नहीं समझी है. जब जिला मुख्यालय के बाढ़पीड़ितों यह हाल है, तो आजमनगर, कदवा, बारसोई के बाढ़पीड़ितों की क्या स्थिति होगी समझा जा सकता है. इस दौरान विधायक सहित कई जनप्रतिनिधियों ने शहर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा किया है. इसमें अधिकारी भी शामिल हैं, लेकिन राहत की बात कोई नहीं कर रहा. सिर्फ यह आश्वासन दिया जा रहा है कि जल्द ही आप लोगों को राहत सामग्री दी जायेगी. शहर के आठ वार्डों में बाढ़ का पानी घुसा है. शहर के लगभग 25 हजार की आबादी बाढ़ के पानी से जूझ रही है.
हजारों की आबादी सड़क किनारे, रेल लाइन किनारे एवं नहर के बांध पर विस्थापित होकर शरण लिए हुए है. हालांकि कुछ स्वयंसेवी संगठनों ने बाढ़पीड़ितों के बीच खिचड़ी का वितरण किया है. प्रभात खबर ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया तो पीड़ितों में काफी गुस्सा देखा गया. पीड़ितों का आरोप था कि उन्हें प्रशासन की ओर से 60 घंटा बीत जाने के बावजूद भी किसी तरह की राहत सामग्री नहीं मिली है. शहर के वार्ड संख्या 3,5,6,7, 21, 22 ,24, 25, 45 वार्ड में बाढ़ का पानी घुसा है. लोग अपने घर बार छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं. कुछ लोग छत पर प्लास्टिक तानकर रह रहे हैं, तो कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं. शहर के वार्ड संख्या तीन छींटाबाड़ी के आसपास, वार्ड संख्या 6 ह्रदयगंज, सियालपाड़ा, वार्ड संख्या 7 बुद्धूचक, वार्ड संख्या 17 अमीनाबाद, वार्ड संख्या 21 तीयरपाड़ा, बंगाली टोला, वार्ड संख्या चार कदवा रामपाड़ा, बैगना हाजी टोला, वार्ड संख्या 45 का वंशी नगर, बैगना, डेहरिया भट्ठा टोला, इस्लामपुर, वर्मा नगर, परतैली मोहल्ले के लोग पूर्णतया बाढ़ से त्राहिमाम कर रहे हैं.
प्रशासन के दावे के विपरीत है सच्चाई
जिला प्रशासन की ओर से चलाये जा रहे राहत और बचाव कार्य का लाभ प्रभावित लोगों को नहीं मिल रहा है. भले ही जिला प्रशासन बाढ़ पीड़ितों एवं विस्थापितों के लिए 175 राहत शिविर चलाने का दावा किया हो. पर जमीनी हकीकत इससे दूर है. अधिकांश राहत शिविरों में बुनियादी सुविधा का घोर अभाव है. शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सेवा, शौचालय, पका हुआ भोजन आदि का घोर अभाव है. राहत शिविर के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है. राहत शिविर को सुचारु रुप से चलाने के लिए जिन पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई है. वह इस कार्य में दिलचस्पी नहीं ले रहे है. समुचित तरीके से निगरानी नहीं होने से राहत शिविर सिर्फ नाम के रह गये हैं. विभिन्न बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में बाढ़ पीड़ित लोगों का गुस्सा इसी बात को लेकर बढ़ रहा है. शुक्रवार को विभिन्न प्रभावित प्रखंडों में बाढ़पीड़ितों ने प्रदर्शन भी किया. संचार सेवा ठप रहने की वजह से भी ग्राउंड स्तर पर राहत कार्य एवं प्रभावित लोगों की स्थिति का पता नहीं चल पा रहा है. शुक्रवार को कई राहत शिविर देखने के बाद यह बात सामने आयी कि यहां महज खाना पूर्ति के लिए राहत शिविर चलाया जा रहा है. शिविर में शौचालय, पीने का शुद्ध पानी, पका भोजन, दव सहित विभिन्न तरह के बुनियादी सुविधा का घोर अभाव है. जिले के डंडखोरा, प्राणपुर, आजमनगर, कदवा आदि कई प्रखंडों के राहत शिविर में जाने के बाद यही स्थिति सामने आयी.
कहते हैं नगर आयुक्त : नगर आयुक्त अजय कुमार ठाकुर ने बताया कि बाढ़पीड़ितों के लिए बीएमपी-7 विद्यालय में राहत शिविर बनाया गया है, लेकिन बाढ़पीड़ित वहां नहीं पहुंच रहे हैं. शहर में बाढ़ का खतरा था, लेकिन रात दिन लग कर नहर को दुरुस्त कर लिया गया है. अब चिंता की बात नहीं है.
