किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने वाले टीकाकरण में पंचायती राज विभाग करेगा सहयोग

जिले में 14 वर्ष से अधिक व 15 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों को लगाया जा रहा ग्राडासिल वैक्सीन

= जिले में 14 वर्ष से अधिक व 15 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों को लगाया जा रहा ग्राडासिल वैक्सीन = लक्षित किशोरियों को टीका लेने के लिए किया जायेगा प्रेरित, पंचायती राज सचिव ने जारी किया पत्र भभुआ सदर. जिला सहित राज्य में 14 वर्ष से अधिक व 15 वर्ष से कम की किशोरियों को ग्राडासिल वैक्सीन लगायी जा रही है. ज्ञात हो कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा को प्रभावित करने वाला एक गंभीर रोग है, जो ह्यूमन पेपिलोमा वायरस के संक्रमण से होता है. पहले से किशोरियों को एचपीवी का टीका लगाया जा रहा है, लेकिन ग्राडासिल वैक्सीन की खासियत है कि इसका एक ही डोज पर्याप्त है. मालूम हो कि इस वैक्सीन से उन्हीं किशोरियों को टीकाकृत किया जा रहा है जिन्हें पहले एचपीवी का टीका नहीं लगाया गया हो. अभियान के प्रभावी व सफल संचालन के लिए अब पंचायती राज विभाग भी उक्त अभियान में सहयोग करेगा. इस बाबत सचिव, पंचायती राज विभाग मनोज कुमार ने सभी जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिये हैं. जारी निर्देश के अनुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर पंचायती राज के प्रतिनिधियों व पदाधिकारियों के साथ टीकाकृत किये जाने वाली किशोरियों को प्रेरित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जानी है. पंचायती राज के प्रतिनिधि अपने क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता, एएनएम व सीएचओ से समन्वय बनाकर लक्षित किशोरियों को निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर प्रेरित कर उनका टीकाकरण करवाने में अपनी भूमिका निभायेंगे. टीकाकरण के संबंध में पंचायत स्तर पर नियमित रूप से अनुश्रवण करने का निर्देश दिया गया है. लक्षणों की पहचान व बचाव ही एकमात्र उपाय है, चूंकि इस कैंसर के शुरुआती चरण में जननेंद्रियों से असामान्य रक्तस्राव या दर्द जैसे कोई लक्षण दिखायी नहीं देते, इसलिए इसे ”साइलेंट किलर” भी कहा जाता है. बीमारी बढ़ने पर वजन कम होना, पैरों में सूजन या पीठ दर्द जैसे संकेत मिलते हैं. ऐसे में बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है. विशेषज्ञों का मानना है कि 35 से 45 वर्ष की आयु में जब महिलाएं अपने परिवार व नौकरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सहारा होती हैं, तब यह बीमारी उन्हें अपनी चपेट में ले लेती है. टीकाकरण के माध्यम से इस जोखिम को लगभग समाप्त किया जा सकता है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक इंतजाम किये गये हैं, ताकि भविष्य में कोई भी किशोरी इस बीमारी की चपेट में न आये. ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता के लिये विशेष अभियान चलाये गये हैं, जिससे इस मुहिम को मजबूती मिलेगी.

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Author: VIKASH KUMAR

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