कैमूर में महाराणा प्रताप महाविद्यालय की जमीन का हुआ हस्तांतरण, राज्यपाल के नाम हुई 5 एकड़ 2 डिसमिल जमीन

तीन साल के लंबे संघर्ष के बाद मोहनिया स्थित महाराणा प्रताप महाविद्यालय की 5 एकड़ जमीन राज्यपाल के नाम स्थानांतरित हो गई है। जानिए पूरी खबर।

मोहनिया शहर स्थित महाराणा प्रताप महाविद्यालय की जमीन को राज्यपाल के नाम स्थानांतरित कराने के लिए चल रहा करीब तीन वर्षों का प्रयास मंगलवार को सफल हो गया. प्रथम चरण में महाविद्यालय की 5 एकड़ 2 डिसमिल जमीन राज्यपाल के नाम निबंधित कर दी गयी. एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी ने राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में भूमि से संबंधित दस्तावेज और प्रक्रिया ग्रहण की.

शासी निकाय की बैठक में लिया गया था निर्णय

महाविद्यालय की जमीन राज्यपाल के नाम स्थानांतरित करने का निर्णय 31 मई 2025 को आयोजित शासी निकाय की बैठक में लिया गया था. इसके बाद जमीन के निबंधन समेत अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा कराने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे थे.

निबंधन शुल्क माफी के बाद साफ हुआ रास्ता

महाविद्यालय प्रशासन करीब डेढ़ वर्ष से जमीन के निबंधन शुल्क को माफ कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रहा था. शासी निकाय के अध्यक्ष एवं विधान पार्षद संतोष कुमार सिंह की पहल के बाद पिछले सप्ताह जिला प्रशासन की ओर से निबंधन शुल्क माफी की स्वीकृति मिली. इसके बाद जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने का रास्ता साफ हुआ.

निबंधन कार्यालय में पूरी हुई प्रक्रिया

मंगलवार सुबह प्रभारी प्राचार्य डॉ. महातिम सिंह निबंधन कार्यालय पहुंचे. यहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद 5 एकड़ 2 डिसमिल जमीन राज्यपाल के नाम निबंधित करायी गयी. इसके बाद शासी निकाय के सरकारी प्रतिनिधि सदस्य और एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी को राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में संबंधित दस्तावेज सौंपे गये.

भूमि दानदाता संघ के पदाधिकारी रहे मौजूद

जमीन निबंधन की प्रक्रिया के दौरान गवाह के रूप में भूमि दानदाता संघ के अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह और कौशलेंद्र प्रताप सिंह मौजूद रहे. भूमि दानदाताओं ने जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने को महाविद्यालय की संपत्ति की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.

महाविद्यालय की संपत्ति को लेकर जतायी गयी थी चिंता

भूमि दानदाताओं के अनुसार महाविद्यालय की संपत्ति और जमीन की सुरक्षा को लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे. उनका आरोप है कि सोसाइटी के दस्तावेजों में कथित हेरफेर के जरिए महाविद्यालय की करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था. इसी के खिलाफ भूमि दानदाताओं और महाविद्यालय से जुड़े लोगों ने जमीन को राज्यपाल के नाम कराने का अभियान शुरू किया था.

जमीन राज्यपाल के नाम होने पर लोगों में खुशी

जमीन राज्यपाल के नाम निबंधित होने के बाद भूमि दानदाताओं, महाविद्यालय कर्मियों और समर्थकों में खुशी का माहौल है. लोगों ने इसे महाराणा प्रताप महाविद्यालय की संपत्ति की सुरक्षा और संस्थान के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है.

कैमूर में बाढ़ का अलर्ट, दुर्गावती जलाशय से 20 हजार क्यूसेक तक पानी छोड़ा गया, समय रहते सुरक्षित करने की तैयारी

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By विनोद कुमार सिंह

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >