मोहनिया सदर. आपातकालीन स्थिति में प्रखंड की 18 पंचायतों के 209 गांवों और शहर के 16 वार्डों को बिजली देने वाले सरहुला पावर सब स्टेशन तक जाने के लिए आज तक पक्का रास्ता नहीं बन सका है. विभागीय अधिकारियों की शिथिलता के कारण बिजलीकर्मियों और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. छह फीडरों से जुड़े इस पावर सब स्टेशन से करीब 70 गांवों में बिजली की आपूर्ति होती है.
2018 में हुआ था सरहुला पीएसएस का उद्घाटन
सरहुला पावर सब स्टेशन का उद्घाटन 4 मई 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिमोट के माध्यम से किया था. विभाग की ओर से सरहुला पीएसएस को हरनाथपुर से आने वाले रास्ते से जोड़ा गया है. लेकिन पीएसएस तक पहुंचने वाला करीब 100 मीटर रास्ता आज भी कच्चा है.
बारिश में जूता-चप्पल हाथ में लेकर पहुंचते हैं कर्मी
पीएसएस तक जाने वाले कच्चे रास्ते का पक्कीकरण कराने की दिशा में विभाग की ओर से कोई रुचि नहीं ली गयी है. इसका नतीजा है कि बरसात के दिनों में बिजली विभाग के कर्मी जूता-चप्पल हाथ में लेकर गिरते-संभलते पैदल ही करीब 100 मीटर की दूरी तय करते हैं.
ग्रामीणों के रास्ते से भी आने-जाने में परेशानी
पीएसएस तक पहुंचने के लिए पांडेय पिपरा को जोड़ने वाले मोड़ के पास से भी एक कच्चा रास्ता जाता है. इस रास्ते को ग्रामीणों ने बनाया है. ग्रामीणों द्वारा बिजलीकर्मियों को इस रास्ते से आने-जाने से रोकने की बात भी सामने आती है. बरसात के दिनों में खेती के लिए ट्रैक्टरों के आवागमन से दोनों कच्चे रास्ते पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं.
ट्रांसफार्मर जलने पर बढ़ सकती है परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरहुला पावर सब स्टेशन तक कोई पक्का रास्ता नहीं होने से आपातकालीन स्थिति में बड़ी समस्या हो सकती है. यदि कभी ट्रांसफार्मर जल जाता है, तो पुराने ट्रांसफार्मर को बाहर ले जाने और नया ट्रांसफार्मर वाहन से पीएसएस तक पहुंचाने में परेशानी होगी. ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है.
बाढ़ के दौरान सरहुला पीएसएस ने संभाली थी बिजली व्यवस्था
चालू माह में बाढ़ के पानी से मोहनिया पावर हाउस में पानी भर जाने के कारण शहर और गांवों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी. उस समय फीडर नंबर दो सरहुला से आपातकालीन स्थिति में पूरे मोहनिया प्रखंड को बिजली आपूर्ति करने का काम किया गया.
18 पंचायतों और 16 वार्डों को बिजली देने में अहम भूमिका
जब प्रखंड की 18 पंचायतों के 209 गांवों और नगर के 16 वार्डों को आपातकालीन स्थिति में सरहुला पावर सब स्टेशन से बिजली दी जाती है, तो इसकी उपयोगिता का अंदाजा लगाया जा सकता है. इसके बावजूद पावर सब स्टेशन तक पक्के रास्ते की सुविधा नहीं मिल सकी है.
नदोखर ग्रिड से जुड़ा है सरहुला पीएसएस
नदोखर ग्रिड से सरहुला पावर सब स्टेशन की दूरी करीब 20 किलोमीटर बतायी जाती है. इस दूरी के बीच नदोखर ग्रिड से आये 33 हजार केवीए के तार हरे पेड़ों के ऊपर से गुजरते हैं. पेड़ों की घनी डालियों के कारण नीचे से तार दिखाई नहीं देते हैं, जिससे फॉल्ट खोजने में बिजलीकर्मियों को कठिनाई होती है.
सिंगल सर्किट से लंबे समय तक बाधित हो सकती है बिजली
सरहुला पावर सब स्टेशन के सिंगल सर्किट से जुड़े होने के कारण किसी तरह की खराबी आने पर लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है. वहीं, रामगढ़ से चौरसिया पावर सब स्टेशन को 33 हजार केवीए से जोड़ा गया है. रामगढ़ से आने वाली बिजली मोहनिया-रामगढ़ पथ पर भूंडी टेकरी नहर के पास तक निर्बाध रूप से काम कर रही है.
डबल सर्किट मिलने से उपभोक्ताओं को होगा लाभ
यदि सरहुला पावर सब स्टेशन को रामगढ़ से आने वाले 33 हजार केवीए लाइन से जोड़ दिया जाता है, तो इसे डबल सर्किट की सुविधा मिल सकती है. ऐसी स्थिति में एक सर्किट में खराबी आने पर दूसरे सर्किट से जुड़े फीडरों के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति जारी रखी जा सकती है.
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