रोहतास जिले के करवंदिया में एक बार फिर जल्द पत्थर खनन शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है. सरकार के स्तर से खनन शुरू कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. इसके लिए करवंदिया में पत्थर उत्खनन के लिए चिन्हित वन भूमि के बदले कैमूर जिले में गैर वन भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.
1300 एकड़ वन भूमि पर होना है पत्थर खनन
खनन विभाग ने रोहतास के करवंदिया में करीब 1300 एकड़ जमीन को पत्थर उत्खनन के लिए चिन्हित किया है. यह जमीन वन विभाग के अधीन है. वन भूमि का उपयोग खनन के लिए करने के नियमों के तहत उसके बदले गैर वन भूमि हस्तांतरित करनी होगी. इसी प्रक्रिया के तहत कैमूर जिले में जमीन चिन्हित की गई है.
कैमूर में 2364 एकड़ जमीन की गई चिन्हित
करवंदिया में खनन के लिए चिन्हित वन भूमि के बदले कैमूर जिले के अधौरा अंचल में 2364 एकड़ गैर वन भूमि चिन्हित किए जाने की जानकारी दी गई है. वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में जमीन की मापी कराकर रकबा, खाता और प्लॉट से संबंधित विवरण तैयार किया गया है. इसके बाद जमीन हस्तांतरण का प्रस्ताव खनन विभाग को भेजा गया है.
अधौरा की 17 मौजा में है जमीन
वन विभाग को हस्तांतरित करने के लिए चिन्हित जमीन कैमूर जिले के अधौरा अंचल क्षेत्र की 17 मौजा में स्थित है. अधिकारियों के अनुसार चिन्हित जमीन कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में है और गैर वन भूमि की श्रेणी में आती है. जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद करवंदिया में पत्थर खनन शुरू करने का रास्ता और साफ हो जाएगा.
खनन विभाग के सचिव ने दिए थे निर्देश
चिन्हित जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर खनन विभाग के सचिव भी कैमूर पहुंचे थे. उन्होंने डीएम समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर जमीन की मापी और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने का निर्देश दिया था. इसके बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में जमीन की मापी कराकर प्रस्ताव तैयार किया.
करवंदिया का पत्थर माना जाता था उच्च कोटि का
करवंदिया में करीब दो दशक पहले बड़े स्तर पर पत्थर खनन हुआ करता था. उस समय यहां का पत्थर बिहार समेत दूसरे राज्यों में भी उच्च कोटि का माना जाता था. रोहतास से बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में पत्थर की आपूर्ति होती थी. इससे निर्माण कार्यों के लिए पत्थर आसानी से उपलब्ध होता था और कीमत भी अपेक्षाकृत नियंत्रित रहती थी.
खनन बंद होने से बढ़ी दूसरे राज्यों पर निर्भरता
करवंदिया में पत्थर खनन बंद होने के बाद बिहार को विकास कार्यों और निजी निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश और झारखंड से पत्थर मंगाना पड़ता है. इससे पत्थर की कीमतों पर भी असर पड़ा है. स्थानीय स्तर पर पत्थर खनन शुरू होने से निर्माण कार्यों के लिए इसकी उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है.
वन भूमि बनी थी खनन की सबसे बड़ी बाधा
करवंदिया में दोबारा पत्थर खनन शुरू करने की योजना में सबसे बड़ी बाधा वन क्षेत्र की जमीन है. जिन पहाड़ों में खनन किया जाना है, उनका बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र में आता है. नियमों के तहत वन भूमि के इस्तेमाल के बदले गैर वन भूमि उपलब्ध करानी होती है. इसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कैमूर में जमीन चिन्हित की गई है.
जमीन हस्तांतरण के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
सरकार की योजना के तहत करवंदिया में खनन के लिए चिन्हित वन भूमि के बदले कैमूर में गैर वन भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की जानी है. प्रस्ताव खनन विभाग के सचिव को भेजे जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया पर नजर है. जमीन का हस्तांतरण पूरा होने के बाद करवंदिया में पत्थर खनन शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा.
एडीएम ने क्या बताया
एडीएम अनिल कुमार ने बताया कि रोहतास में पत्थर खनन के लिए चिन्हित जमीन के बदले कैमूर जिले में जमीन वन विभाग को हस्तांतरित करने के लिए चिन्हित की गई है. उन्होंने बताया कि इसका प्रस्ताव बनाकर खनन विभाग के सचिव को भेज दिया गया है. हालांकि, एडीएम के बयान में हस्तांतरित की जाने वाली जमीन का रकबा 1364 एकड़ बताया गया है, जबकि प्रक्रिया से जुड़े अन्य विवरण में 2364 एकड़ जमीन का उल्लेख किया गया है.
