Kaimur News: रोहतास और कैमूर जिले को जोड़ने वाला सोन उच्च स्तरीय मुख्य नहर पथ इन दिनों पूरी तरह बदहाली के दौर से गुजर रहा है. बरसात में उभरे जानलेवा गड्ढों की वजह से वाहनों का परिचालन लगभग ठप हो चुका है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब आठ-नौ साल पहले बनी यह सड़क अब सैकड़ों गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे दोनों जिलों के करीब दो दर्जन गांवों की 30 हजार से अधिक आबादी को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है.
13 किमी में सैकड़ों गड्ढे, वाहनों के टूटने का डर
बेलांव निवासी मिथलेश गुप्ता, मनोज सिंह और ठकुरहट के विमलेश पांडेय ने बताया कि बेलांव से चेनारी तक इस पथ की कुल लंबाई करीब 13 किलोमीटर है. सड़क की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि ऑटो, ई-रिक्शा और पिकअप चालक इस रास्ते पर जाने से कतराते हैं. राहगीरों और वाहन चालकों को हमेशा कमानी की पत्ती टूटने, टायर फटने और दुर्घटनाग्रस्त होने की चिंता सताती रहती है.
बाजार जाने के लिए 5 किमी का अतिरिक्त फेरा
सड़क खराब होने के चलते ग्रामीणों को बेलांव और चेनारी बाजार तक पहुंचने के लिए चार से पांच किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है. पहले जहां गांवों से सीधे यात्री वाहन सुलभ थे, वहीं अब साधन न मिलने से लोगों को पैदल सफर करना पड़ रहा है. इसके अलावा, रास्ते में दूर-दूर तक कोई गैरेज या मैकेनिक की दुकान न होने के कारण वाहन खराब होने पर चालकों की परेशानी दोगुनी हो जाती है.
ओवरलोड मिट्टी ढुलाई से सड़क हुई बदहाल
बसिनी गांव के पिंटू सिंह ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के एक दशक बीत जाने के बाद भी विभाग ने इसकी सुध नहीं ली. इसके साथ ही पिछले एक वर्ष से पीएनसी कंपनी द्वारा मिट्टी की भारी ओवरलोड ढुलाई किए जाने से सड़क पूरी तरह से धंस गई है. बारिश के दिनों में जलभराव के चलते गड्ढों की गहराई का पता नहीं चलता, जिससे आए दिन बाइक सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं. ग्रामीणों ने पथ निर्माण विभाग से अविलंब सड़क का कायाकल्प कराने की मांग की है.
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