कैमूर : तेनुआ-दुबौली लिंक पथ की बदहाली से नाराज ग्रामीण धरने पर बैठे, पक्की सड़क की मांग

Kaimur News : कैमूर के तेनुआ-दुबौली लिंक पथ पर ग्रामीण पक्की सड़क की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं. दशकों से खराब सड़क के कारण उन्हें आवागमन, बच्चों की पढ़ाई और बीमारों को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी हो रही है. ग्रामीणों ने भूख हड़ताल और वोट बहिष्कार की चेतावनी दी है.

Kaimur News : रामपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत तेनुआ-दुबौली लिंक पथ से जुड़े धवपोखर गांव के महादलित और अल्पसंख्यक बस्ती के लोगों को आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क की सुविधा नहीं मिल सकी है. सड़क की बदहाल स्थिति से नाराज ग्रामीण सोमवार से धरने पर बैठ गये हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क नहीं होने के कारण उन्हें लंबे समय से परेशानी झेलनी पड़ रही है और बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है.

कीचड़ भरी सड़क से मुख्यालय और स्कूल जाने को मजबूर

ग्रामीणों ने बताया कि उक्त सड़क से होकर लोग जिला और प्रखंड मुख्यालय के अलावा बेलांव बाजार की मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं. वहीं, छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए जलालपुर हाई स्कूल भी इसी रास्ते से जाते हैं. सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बरसात के मौसम में सड़क पर कीचड़ और जलजमाव के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है.

चुनाव के समय वादे, बाद में नहीं होती सुनवाई

महादलित और अल्पसंख्यक बस्ती के लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय विभिन्न दलों के नेता गांव में आते हैं और सड़क निर्माण का आश्वासन देकर चले जाते हैं. चुनाव के बाद समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता. ग्रामीणों के अनुसार सड़क की दर्जनों बार मापी भी करायी गयी, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है.

कई स्तरों पर शिकायत के बावजूद नहीं निकला समाधान

ग्रामीण अभय कुमार, सोनू कुमार, संतोषी राम, लाली राम सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि सड़क की समस्या को लेकर कई बार डीएम कार्यालय जाकर लिखित और मौखिक रूप से शिकायत की गयी है. इसके अलावा जिला प्रशासन, पंचायत के मुखिया, बीडीसी और प्रखंड विकास पदाधिकारी से भी समस्या के समाधान की गुहार लगायी गयी, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है.

बरसात में तीन-चार महीने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण गरीब परिवारों के बच्चों को बरसात के दौरान करीब तीन से चार महीने तक स्कूल जाने में परेशानी होती है. ग्रामीणों के अनुसार यह लिंक पथ जलालपुर, मजगांवा, लिली, थिलोई, सिसवार, जलालपुर हाई स्कूल सहित रोहतास जिले के चेनारी-तेलाड़ी क्षेत्र के करीब दस गांवों को जोड़ता है. ऐसे में सड़क का निर्माण होने से कई गांवों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी.

बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में होती है परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी उस समय होती है, जब गांव में किसी बुजुर्ग, प्रसव महिला या अन्य व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाती है. सड़क की स्थिति खराब होने के कारण मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए किसान से ट्रैक्टर मांगना पड़ता है. ट्रैक्टर नहीं मिलने पर खाट, फोल्डिंग या बेडशीट के सहारे मरीज को मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. इसके बाद निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है.

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मंगलवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी

ग्रामीणों ने कहा कि लगातार समस्या झेलने के बाद सभी ने सर्वसम्मति से धरना देने का निर्णय लिया है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो मंगलवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के साथ धरना शुरू किया जायेगा.

क्या कहते हैं बीडीओ

इस संबंध में बीडीओ ने कहा कि यदि ऐसी समस्या है, तो संबंधित मुखिया से बात कर इसके समाधान का प्रयास किया जायेगा. आवश्यकता पड़ने पर पथ निर्माण विभाग से भी संपर्क किया जायेगा.

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ग्रामीणों ने जतायी नाराजगी

फारूक हुसैन अंसारी ने कहा कि सड़क की दर्जनों बार मापी होने के बाद भी आज तक इसे पक्की नहीं किया गया है, जबकि यह करीब दस गांवों को जोड़ने वाला लिंक पथ है. जिला प्रशासन से गुहार लगाकर ग्रामीण थक चुके हैं. उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण नहीं होने पर ग्रामीण इस बार चुनाव में वोट का बहिष्कार करने का निर्णय ले सकते हैं.

अजमत अंसारी ने कहा कि यह गांव का मुख्य रास्ता है और इसका निर्माण होना चाहिए. उन्होंने कहा कि कई मंत्री और नेता अब तक गांव में आ चुके हैं और सड़क की स्थिति भी देख चुके हैं, लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ. उन्होंने भी सड़क निर्माण होने तक वोट नहीं देने की बात कही.

बीरेंद्र राम ने कहा कि बरसात के दिनों में सड़क पर चारों तरफ पानी भरा रहता है. किसी के बीमार होने पर ट्रैक्टर, खाट, फोल्डिंग या बेडशीट के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि इस बार के चुनाव में वोट के बहिष्कार पर ग्रामीण विचार कर रहे हैं.

जहूर अंसारी ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण नारकीय स्थिति में जीवन जीने को मजबूर हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उनके बच्चों के हिस्से में भी पक्की सड़क की सुविधा नहीं है. उन्होंने सड़क निर्माण नहीं होने को लेकर सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी जतायी.

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By राजू कुमार

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