प्रतिनिधि, पुसौली. ईस्ट सेंट्रल रेलवे के गया-डीडीयू रेलखंड स्थित पुसौली रेलवे स्टेशन पर कोरोना काल में बंद किया गया बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का ठहराव करीब चार साल बाद भी बहाल नहीं हुआ है. ट्रेन का स्टॉपेज बंद रहने से पुसौली और आसपास के गांवों के यात्रियों को वाराणसी और पटना जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कोरोना काल के बाद नहीं बहाल हुआ ठहराव
वाराणसी से राजगीर जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का पुसौली स्टेशन पर पहले नियमित ठहराव होता था. कोरोना काल में ट्रेन का परिचालन बंद होने के बाद जब सेवा दोबारा शुरू हुई, तब पुसौली स्टेशन पर इसका ठहराव बहाल नहीं किया गया. उस समय रेलवे की ओर से कहा गया था कि जिन स्टेशनों पर आरक्षण काउंटर हैं, वहीं ट्रेन का ठहराव दिया जाएगा. इसके बाद से पुसौली स्टेशन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है.
मीरा कुमार की पहल पर शुरू हुआ था स्टॉपेज
स्थानीय लोगों के अनुसार तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की पहल पर पुसौली स्टेशन पर बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का ठहराव शुरू हुआ था. स्टॉपेज मिलने के बाद क्षेत्र के यात्रियों को वाराणसी जाने के लिए सुविधाजनक रेल सेवा उपलब्ध हुई थी. सुबह के समय व्यापारी, मरीज और छात्र बड़ी संख्या में इस ट्रेन से वाराणसी जाते थे.
स्टॉपेज बंद होने से बस पर निर्भर यात्री
पुसौली में ट्रेन का ठहराव बंद होने के बाद वाराणसी और पटना जाने वाले यात्रियों को बस या दूसरे रेलवे स्टेशनों का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे यात्रियों का समय और खर्च दोनों बढ़ रहा है. खासकर व्यापारियों, छात्रों और इलाज के लिए बाहर जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
2022 में धरना देकर उठाई गई थी मांग
बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस और इंटरसिटी एक्सप्रेस के ठहराव की मांग को लेकर वर्ष 2022 में स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पुसौली स्टेशन पर धरना दिया था. स्टेशन अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया था कि मोहनिया, सोनहन और कुदरा प्रखंड के दर्जनों गांवों के लोग पुसौली स्टेशन से यात्रा करते हैं. इसके बावजूद अब तक ट्रेन का ठहराव बहाल नहीं हुआ है.
सिर्फ पैसेंजर ट्रेनों का हो रहा ठहराव
स्थानीय लोगों का कहना है कि फिलहाल पुसौली स्टेशन पर मुख्य रूप से पैसेंजर ट्रेनों का ही ठहराव होता है. क्षेत्र में यात्रियों की संख्या और आसपास के गांवों की जरूरत को देखते हुए लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव की मांग लगातार उठती रही है. लोगों का कहना है कि बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का स्टॉपेज मिलने से क्षेत्र के यात्रियों को सीधा लाभ होगा.
स्टेशन के विकास पर हो रहा काम
पुसौली स्टेशन के विकास के लिए रेलवे की ओर से भी काम कराया जा रहा है. स्टेशन भवन, प्लेटफॉर्म और फुट ओवरब्रिज से जुड़े निर्माण कार्य पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेशन का विकास स्वागत योग्य है, लेकिन यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा देने के लिए प्रमुख ट्रेनों का ठहराव भी जरूरी है.
ठहराव शुरू होने पर बढ़ा था राजस्व
स्थानीय लोगों के अनुसार पुसौली स्टेशन पर बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का ठहराव शुरू होने के बाद स्टेशन के मासिक राजस्व में भी बढ़ोतरी हुई थी. लोगों का दावा है कि पिछले करीब चार वर्षों से स्टॉपेज बंद रहने के कारण स्टेशन के राजस्व पर भी असर पड़ा है. हालांकि रेलवे की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है.
ग्रामीणों ने फिर उठाई ठहराव बहाल करने की मांग
भेलमा गांव निवासी पवन सिंह ने बताया कि मीरा कुमार की पहल पर जब बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का ठहराव शुरू हुआ था, तब क्षेत्र के लोगों को काफी सुविधा मिली थी. उन्होंने कहा कि किन कारणों से स्टॉपेज बंद किया गया और अब तक इसे बहाल क्यों नहीं किया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी लोगों को नहीं मिल सकी है.
व्यापारियों को भी हो रही परेशानी
कपड़ा व्यवसायी कमलेश केशरी ने कहा कि ट्रेन का ठहराव बंद होने से व्यापारियों को वाराणसी और पटना जाने में काफी परेशानी हो रही है. मजबूरी में बस से यात्रा करनी पड़ती है. उन्होंने रेलवे प्रशासन से पुसौली स्टेशन पर पहले की तरह बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का ठहराव बहाल करने की मांग की है.
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