फोटो.5कार्यशाला में उपस्थित प्रभारी सीएस सह एसीएमओ =10 फरवरी से शुरू होनेवाले फाइलेरिया मुक्त अभियान को लेकर कार्यशाला आयोजित =11 फरवरी को मनाया जायेगा मेगा एमडीए कैंप, कराया जायेगा दवा सेवन =जिले में लगभग 13 लाख लाभार्थियों को खिलायी जायेगी फाइलेरियारोधी दवा जिले के नौ प्रखंडों में घर-घर जाकर दवा खिलायेंगे स्वास्थ्यकर्मी भभुआ सदर. जिले में 10 फरवरी से लगभग 13 लाख जिलेवासियों को फाइलेरिया रोग से मुक्त करने के लिए दवाएं खिलायी जायेगी. 10 फरवरी से शुरू किये जा रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन को लेकर गुरुवार को जिले के चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग ने सिविल सर्जन सभागार में संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया. कार्यशाला का उद्घाटन प्रभारी सीएस सह एसीएमओ डॉ शांति कुमार मांझी ने किया. कार्यशाला में डॉ मांझी ने बताया कि 10 फरवरी से शुरू हो रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम कार्यक्रम के दौरान सभी लाभार्थियों को फाइलेरियारोधी दवा खिलाना सुनिश्चित किया जायेगा. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा के सेवन के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जायेगा, जिसमे बूथ लगा कर जीविका कर्मियों व उनके परिवार के लोगों को दवा खिलाई जायेगी. अभियान के दौरान सभी लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा सेवन करायेंगे. इसके अतिरिक्त प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिवस तक घर-घर जाकर लाभार्थियों को दवा का सेवन कराया जाना सुनिश्चित करेंगे. स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य जिले को पूरी तरह से फाइलेरिया मुक्त बनाना है. उन्होंने कहा कि फाइलेरिया रोधी दवा पूरी तरह सुरक्षित हैं और रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं. सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और कार्यक्रम के दौरान किसी लाभार्थी को दवा सेवन के पश्चात किसी प्रकार की कोई कठिनाई प्रतीत होती है, तो उससे निबटने के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रिस्पॉन्स टीम मौजूद रहेगी. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, डॉ सत्य स्वरुप ने बताया कि 10 फरवरी से शुरू होने वाले सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम कार्यक्रम में जिले के नौ प्रखंडों में रहनेवाले कुल 1301509 लाभार्थियों को कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डीइसी और अल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर अपने सामने खिलायी जायेगी. दवाओं का वितरण बिलकुल भी नहीं किया जायेगा. दरअसल, यह अभियान जिला के मोहनिया, दुर्गावती तथा भभुआ शहरी क्षेत्र में नहीं चलाया जायेगा. क्योंकि, इन प्रखंडों में माइक्रोफाइलेरिया दर एक प्रतिशत से कम पाया गया है. . =फाइलेरिया से मुक्ति के लिए जरूरी है दवा, जरूर करें सेवन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ऋषिकेश जयसवाल ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है और यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया, दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है. यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इससे बचाव न किया जाये तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है. वहीं, फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे : हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों में सूजन) और दूधिया सफेद पेशाब (काईलूरिया) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक भेदभाव सहना पड़ता है. इसलिए सभी को इसकी खुराक खाना जरूरी है. फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को लेकर आयोजित कार्यशाला में गुरुवार को पिरामल स्वास्थ्य, लेप्रा सोसाइटी व सिफार के प्रतिनिधि के साथ सीएचओ-पीएसपी सदस्य उपस्थित थे.
कैमूर को फाइलेरिया मुक्त जिला बनाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता : सीएस
10 फरवरी से शुरू होनेवाले फाइलेरिया मुक्त अभियान को लेकर कार्यशाला आयोजित
