Kaimur News : लगातार बढ़ रहे बाढ़ के पानी ने कान्ही गांव के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गांव के चारों तरफ पानी भर जाने से रामगढ़-देवहलिया मुख्य पथ से गांव का संपर्क पूरी तरह टूट गया है. सड़क पर पानी का बहाव होने के कारण आवागमन बंद हो गया है और पूरा गांव टापू में तब्दील हो गया है. बाढ़ के बीच ग्रामीण अपने घरों में रहने को मजबूर हैं, जबकि जरूरी काम के लिए गांव से बाहर निकलना चुनौती बन गया है.
हर साल बाढ़ में कट जाता है संपर्क
गांव के शिक्षक रवि सिंह यादव ने बताया कि नदी के उफान पर आते ही गांव का संपर्क मुख्य सड़क से टूट जाता है. यह समस्या हर वर्ष ग्रामीणों के सामने खड़ी होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं होने से बाढ़ आते ही परेशानी फिर शुरू हो जाती है. बाढ़ के पानी से खेतों में लगी लाखों रुपये की फसल भी बर्बाद हो जाती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं, पानी के बीच फंसे ग्रामीण
सबसे गंभीर स्थिति गांव से मुख्य सड़क तक आने-जाने को लेकर बनी हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग डूबने के बाद सरकारी स्तर पर समय पर नाव की व्यवस्था नहीं हो पाती. ऐसे में जरूरत पड़ने पर लोगों को पानी के बीच से जोखिम उठाकर निकलना पड़ता है. आपात स्थिति में यह परेशानी और गंभीर हो जाती है.
मरीजों और बुजुर्गों की बढ़ी चिंता, इलाज भी मुश्किल
बाढ़ के कारण सबसे अधिक परेशानी बीमार, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों को उठानी पड़ रही है. अचानक किसी की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. गांव से बाहर इलाज के लिए जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों को रास्ता बंद होने के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं राशन, दवा और अन्य जरूरी सामान लाने में भी दिक्कत हो रही है.
बच्चों की पढ़ाई पर लगा बाढ़ का ब्रेक
गांव के चारों ओर पानी भरने से बच्चों का स्कूल जाना भी प्रभावित हो गया है. रास्ते में पानी होने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाढ़ का पानी जल्द नहीं घटा तो बच्चों की पढ़ाई और प्रभावित होगी.
फसल बर्बादी के साथ रोजगार पर भी संकट
कान्ही के किसानों के लिए बाढ़ सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि आर्थिक संकट भी लेकर आयी है. खेतों में पानी भरने से तैयार और लगी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. ग्रामीणों के अनुसार हर वर्ष बाढ़ के कारण किसानों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है. जलस्तर बढ़ने के साथ खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहने पर फसल पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका बढ़ गयी है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की
ग्रामीणों ने प्रशासन से कान्ही की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत और बचाव की व्यवस्था करने की मांग की है. उन्होंने गांव के लिए सरकारी नाव उपलब्ध कराने, मरीजों एवं जरूरतमंदों तक दवाइयां और खाद्य सामग्री पहुंचाने तथा जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है. साथ ही बाढ़ का पानी उतरने के बाद सड़क संपर्क को स्थायी रूप से बहाल करने की दिशा में ठोस पहल करने की मांग उठायी है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ आने के बाद संपर्क टूटना और फिर सरकारी नाव के इंतजार में परेशान होना अब स्थायी समस्या बन चुकी है. प्रशासन समय रहते प्रभावी व्यवस्था करे तो कान्ही के लोगों को हर वर्ष बाढ़ के दौरान ऐसी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा.
