कैमूर के अधौरा प्रखंड में बरसात का मौसम दूरस्थ पहाड़ी गांवों के शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. पहाड़ी इलाकों के विद्यालयों में पढ़ाने जाने वाले शिक्षक और शिक्षिकाएं फिसलन भरी सड़कों, उफनती नदियों और अधूरी सड़क निर्माण योजनाओं के बीच हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं. कई बार शिक्षक रास्ते में गिरकर चोटिल हो जाते हैं, जबकि नदी का पानी बढ़ने पर उन्हें विद्यालय में ही रात गुजारनी पड़ती है. ऐसी ही परेशानी चैनपुर प्रखंड के पहाड़ी इलाकों में भी सामने आ रही है.
कदहर कला-बड़ाप सड़क बनी शिक्षकों के लिए मुसीबत
अधौरा प्रखंड के कदहर कला-बड़ाप जाने वाली सड़क का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से कराया जा रहा है. ग्रामीणों और शिक्षकों का आरोप है कि संवेदक ने सड़क पर मिट्टी और मौरम बिछाने के बाद महीनों से काम बंद कर रखा है. बरसात में मौरम कीचड़ में बदल गयी है और सड़क बेहद फिसलन भरी हो गयी है. इससे आए दिन शिक्षक बाइक से गिरकर घायल हो रहे हैं और कई जगह पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है.
अधूरी सड़क से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, कदहर कला-बड़ाप सड़क का उद्घाटन सांसद मनोज कुमार ने काफी पहले किया था, लेकिन निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है. लोगों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण समय पर पूरा कर दिया जाता, तो बरसात के दिनों में शिक्षकों और ग्रामीणों को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती.
तेलहारकुंड के आगे हर दिन नदी पार करने की चुनौती
तेलहारकुंड से डूमरकोन, बघेला, हरसोती और झरिया स्थित विद्यालयों तक पहुंचना बरसात में किसी परीक्षा से कम नहीं है. छोटी-छोटी पहाड़ी नदियां अचानक उफान पर आ जाती हैं. इससे रास्ता बंद हो जाता है और शिक्षक पानी कम होने का घंटों इंतजार करते हैं. कई बार पानी नहीं घटने पर उन्हें स्कूल परिसर में ही रात बितानी पड़ती है.
महिला शिक्षिकाओं की बढ़ जाती है परेशानी
बारिश के कारण विद्यालय में रात गुजारने की स्थिति महिला शिक्षिकाओं के लिए और अधिक मुश्किल हो जाती है. अंधेरा होने के बाद घर लौटना संभव नहीं रहता. ऐसे में सुरक्षा के साथ विद्यालय में ठहरने और अन्य बुनियादी सुविधाओं की चिंता भी बनी रहती है.
सेंचुरी क्षेत्र में ऑल वेदर सड़क की मांग
वन विभाग के सेंचुरी यानी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में सड़क निर्माण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. शिक्षकों का कहना है कि वन विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के बीच समन्वय नहीं होने के कारण स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है. उनका कहना है कि इन मार्गों पर ऑल वेदर सड़क का निर्माण जरूरी है, ताकि बारिश में आवागमन बाधित न हो.
शिक्षकों ने सुनायी बारिश में ड्यूटी की मुश्किलें
शिक्षक बलजीत सिंह, श्रीकृष्ण सिंह, बलिराम सिंह और शिक्षिका शिखा कुमारी समेत कई शिक्षकों ने बताया कि बारिश होने के बाद शाम तक घर लौटना कई बार संभव नहीं होता. ऐसी स्थिति में उन्हें रात विद्यालय में ही बितानी पड़ती है. शिक्षकों के अनुसार, रोजाना जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करना उनकी मजबूरी बन गयी है. कई शिक्षक रास्ते में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं.
वायरल वीडियो के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आये, जिनमें शिक्षक फिसलन भरी सड़कों पर गिरते और रास्ते में संघर्ष करते दिखाई दिये. ग्रामीणों का आरोप है कि इन वीडियो के सामने आने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है. लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण जल्द पूरा नहीं हुआ, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.
खराब सड़क का असर बच्चों की पढ़ाई पर
दूरस्थ विद्यालयों तक पहुंचने में होने वाली परेशानी का सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है. कई बार शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पाते, जबकि वापसी की चिंता के कारण पढ़ाई भी प्रभावित होती है. अभिभावकों का कहना है कि यदि सड़कें बेहतर होंगी, तो शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंच सकेंगे और बच्चों की पढ़ाई में भी व्यवधान कम होगा.
सड़क की बदहाली अब शिक्षा और सुरक्षा का सवाल
अधौरा और चैनपुर के पहाड़ी इलाकों में सड़क की बदहाली अब सिर्फ विकास का मुद्दा नहीं रह गयी है, बल्कि यह शिक्षकों की सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को बरसात से पहले स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि शिक्षकों और विद्यार्थियों को सुरक्षित आवागमन मिल सके.
ग्रामीणों और शिक्षकों ने रखीं ये प्रमुख मांगें
ग्रामीणों और शिक्षकों ने कदहर कला-बड़ाप सड़क का निर्माण तत्काल पूरा कराने की मांग की है. इसके साथ ही तेलहारकुंड से डूमरकोन, बघेला, हरसोती और झरिया मार्ग पर ऑल वेदर सड़क बनाने की मांग उठायी गयी है. सेंचुरी क्षेत्र में वन विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर स्थायी समाधान निकालने, जोखिम वाले स्थानों पर अस्थायी पुल व सुरक्षा व्यवस्था करने तथा वायरल वीडियो और दुर्घटनाओं की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदक पर कार्रवाई की मांग भी की गयी है.
