एडीजे षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रमोद कुमार पांडे की अदालत ने महिला थाना कांड संख्या 19/2024 में स्पीडी ट्रायल के तहत सामूहिक दुष्कर्म के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 46 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.
चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा
सजा पाने वालों में साहे बाहे गांव निवासी मोती कुमार मूर्ति, मोहन कुमार, सुखु बिंद और विकास कुमार शामिल हैं. अदालत ने चारों को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी. इसके साथ ही प्रत्येक पर 46 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया.
शौचालय जाते समय किशोरी को जबरन ले गये
विशेष लोक अभियोजक शशि भूषण पांडे ने बताया कि 21 अप्रैल 2024 की सुबह पीड़िता शौचालय जाने के लिए निकली थी. इसी दौरान चारों आरोपियों ने उसे जबरन उठाकर पुलाव के ढेर के पास ले गये और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. आरोपियों ने घटना की जानकारी किसी को देने पर पीड़िता के पिता और भाई को जान से मारने की धमकी भी दी थी.
चार दिन बाद सामने आयी घटना
धमकी के कारण पीड़िता ने घटना के बारे में तत्काल किसी को जानकारी नहीं दी. घटना के करीब चार दिन बाद उसने अपने ममेरे भाई को पूरी बात बतायी. इसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से भभुआ महिला थाने में चारों आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी गयी.
जांच के बाद कोर्ट में दाखिल हुआ आरोपपत्र
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान घटना को सत्य पाया और आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में समर्पित किया. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दस्तावेजी साक्ष्य समेत कुल नौ साक्ष्य प्रस्तुत किये गये. कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी करार दिया.
स्पीडी ट्रायल में सुनाया गया फैसला
विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत की गयी. न्यायालय ने संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. साथ ही प्रत्येक दोषी पर 46 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया.
