कैमूर : 15 लाख खर्च, फिर भी सड़क पर कूड़ा, कचरा साफ कर रहे किशोर, आखिर जिम्मेदार कौन?

रामगढ़ नगर पंचायत में सफाई के नाम पर हर माह 15 लाख खर्च हो रहे हैं, लेकिन सड़क किनारे कूड़े के ढेर में बच्चों से काम कराया जा रहा है। प्रशासन की बड़ी लापरवाही।

Kaimur Municipal Corporation : रामगढ़ नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब 15 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद हालात पर सवाल उठ रहे हैं. देवहलिया मुख्य सड़क के किनारे कूड़े से भरे वाहन से सफाई कर्मियों के बजाय किशोरों से कचरा उतरवाने का मामला सामने आया है. दिन के उजाले में व्यस्त सड़क किनारे कूड़े के बीच किशोरों से काम कराया जाना सफाई व्यवस्था के साथ बाल श्रम को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है.

कूड़े के बीच किशोरों से कराया जा रहा काम

एक ओर सरकार बच्चों को स्कूल से जोड़ने और बाल मजदूरी से दूर रखने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर रामगढ़ नगर पंचायत क्षेत्र में कथित तौर पर किशोरों से कूड़ा उठाने और उतारने का काम कराया जा रहा है. सवाल उठ रहा है कि सफाई कार्य के लिए निर्धारित मजदूरों की मौजूदगी के बावजूद किशोरों को किसकी अनुमति से काम पर लगाया गया.

13 वार्डों की सफाई पर हर माह लाखों रुपये

नगर पंचायत के 13 वार्डों की सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब 15 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी है. विभागीय स्तर पर सफाई के लिए प्रतिदिन 51 मजदूर लगाए जाते हैं. इसके अलावा 20 हैंड ट्रॉली, एक ट्रैक्टर, एक टीपर और जरूरत के अनुसार जेसीबी का इस्तेमाल किया जाता है.

कूड़ा वाहन से कचरा उतारते किशोरदेवहलिया मुख्य सड़क किनारे लगा कूड़े का ढेर | Prabhat Khabar Network

संवेदक समेत वाहनों पर होता है भुगतान

जानकारी के अनुसार करीब 15 लाख रुपये के खर्च में संवेदक को लगभग 14.10 लाख रुपये, जेसीबी के लिए करीब 23,500 रुपये और ट्रैक्टर के लिए करीब 10,900 रुपये का भुगतान किया जाता है. इसके बावजूद सफाई व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं.

सड़क किनारे डंप हो रहा घरों का कचरा

घरों से उठाया गया कूड़ा देवहलिया मुख्य सड़क के किनारे डंप किया जा रहा है. कूड़े के ढेर में आग लगाए जाने के बाद जहरीला धुआं और दुर्गंध फैलती है. इससे सड़क से गुजरने वाले लोगों और आसपास के दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

चार साल बाद भी नहीं मिला कूड़ा निस्तारण केंद्र

रामगढ़ को नगर पंचायत का दर्जा मिले चार वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कूड़ा निस्तारण केंद्र का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है. नगर की गलियों से कूड़ा उठाने पर हर माह लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण की व्यवस्था जमीन पर नहीं उतर सकी है.

महादलित बस्ती के पास डंप हो रहा कचरा

जिस स्थान पर कूड़ा डंप किया जा रहा है, उससे करीब 200 मीटर की दूरी पर महादलित बस्ती भी स्थित है. ऐसे में कूड़े से निकलने वाली दुर्गंध, धुआं और संभावित संक्रमण को लेकर आसपास के लोगों की चिंता बढ़ गई है.

बाल श्रम को लेकर उठे गंभीर सवाल

किशोरों से कूड़ा उतरवाने का मामला सामने आने के बाद बाल श्रम को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. कूड़े के बीच काम करने से बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरा हो सकता है. प्लास्टिक, मेडिकल, इलेक्ट्रॉनिक और अन्य अपशिष्ट के संपर्क में आने से जोखिम और बढ़ जाता है.

सफाई कर्मियों के नाम पर भुगतान, काम कौन कर रहा?

मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि सफाई कार्य के लिए निर्धारित मजदूरों के नाम पर भुगतान हो रहा है या नहीं और वास्तव में काम कौन कर रहा है. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किशोरों को काम पर लगाने के पीछे किसकी जिम्मेदारी है.

तीन साल पहले स्थल चयन का हुआ था दावा

कूड़ा निस्तारण केंद्र को लेकर करीब तीन वर्ष पहले तत्कालीन नगर पंचायत ईओ राहुल कुमार ने स्थल चिह्नित किए जाने और अंचलाधिकारी से एनओसी की प्रक्रिया चलने की बात कही थी. बाद में निस्तारण केंद्र के लिए टेंडर भी हुआ. टेंडर में दो लोगों ने हिस्सा लिया था, लेकिन एक का कागजात पूरा नहीं होने के कारण प्रक्रिया रद्द कर दी गई.

अब अनुमंडल स्तर पर स्थल चयन की प्रक्रिया

ईओ के अनुसार अब विभागीय पत्र के आधार पर अनुमंडल स्तर पर कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया चल रही है. प्रस्तावित केंद्र में गीले और सूखे कचरे के अलग-अलग निस्तारण की व्यवस्था किए जाने की बात कही जा रही है.

ईओ बोले, किशोरों से काम कराना गलत

नगर पंचायत के ईओ राहुल कुमार ने कहा कि किशोरों से कूड़ा वाहन से कचरा उतरवाना पूरी तरह गलत है. उन्होंने कहा कि मामले की स्वयं जांच करेंगे. यदि शिकायत सही पाई गई, तो संबंधित संवेदक के खिलाफ लेबर सुपरिटेंडेंट को लिखित शिकायत की जाएगी.

कचरा प्रबंधन को लेकर समाजसेवी ने उठाए सवाल

समाजसेवी सह शिक्षक कमलेश शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक, कागज, धातु, बैटरी, पुरानी दवाइयां, बल्ब और इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उचित प्रबंधन नहीं होने से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि प्लास्टिक जलाने से निकलने वाला धुआं भी लोगों के लिए खतरनाक है. नगर को स्वच्छ रखने के लिए कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन जरूरी है.

शिक्षिका बोलीं, सड़क किनारे कूड़ा फेंकना समाधान नहीं

शिक्षिका रिंकी शर्मा ने कहा कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद नगर की कई सड़कों और गलियों में कूड़ा दिखाई देता है. नगर पंचायत बने चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है, लेकिन घरों में कचरा रखने के लिए पर्याप्त डस्टबिन की व्यवस्था नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि घरों से कूड़ा उठाकर सड़क किनारे फेंकना समस्या का समाधान नहीं है.

सफाई व्यवस्था और जवाबदेही पर बड़ा सवाल

रामगढ़ नगर पंचायत में हर माह लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क किनारे कूड़ा डंप हो रहा है और किशोरों से कूड़े के बीच काम कराया जा रहा है, तो सफाई व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है. अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है.


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By Sanjay jaiswal

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